Monthly Archives: April 2017


  • अधूरा

    अधूरा

    यूँ कुछ रोज़ से एक ख्याल आता है मुझको कोई ग़ज़ल जो कहूँ अधूरी रह जाती है गर तस्वीर बनाऊ रंग नहीं मिलते हैं सारे रंग और लफ्ज़ बे-मानी हो जाते हैं जाने कोई गुमान सा...


  • दोहा-मुक्तक

    दोहा-मुक्तक

    मुश्किल तो होती डगर, चली हुई आसान कठिन मान लेते जिसे, आलस में नादान बड़ी चूक करते सदा, अपनी मंजिल दूर पाँव पसारे सो रहे, वे बिस्तर पादान॥-1 कठिन मानकर जूझते, शेर बहादुर बीर रण में...

  • मैं प्यार हूँ

    मैं प्यार हूँ

    मैं प्यार हूँ जी हाँ मैं प्यार हूँ, दिल मेरा बसेरा है.. पर आज मैं भटक रहा हूँ यहाँ से वहां , वहां से यहाँ, खा रहा हूँ दर दर की ठोकर, किसी ‘दिल’ की तलाश...





  • नीर के दोहे

    नीर के दोहे

    नीर लिए आशा सदा,नीर लिए विश्वास ! नीर से सांसें चल रही,देवों का आभास !! अमृत जैसा है “शरद”, कहते जिसको नीर ! एक बूंद भी कम मिले,तो बढ़ जाती पीर !! नीर बिना जीवन नहीं,अकुला...