कविता

व्यंग्य कविता : लिखता हूं पर छपता नहीं

“बसंती दादूर” के वचन । कभी कोई सुनता नहीं।। लिखता हूं रातें जगजग कर। कमबख्त फिर भी छपता नहीं।। रचनाएँ मेरी पढपढ कर । संपादक जी हो गए बोर।। नक्कारखाने मे “तूती” की। किसी ने सुनी कहां है शोर।। लिखने की आदत से ऐसा हूं मजबूर। कलम घिसाई से नही रह सकता मैं दूर। हिम्मत-ए-लेखक त मदद-ए-संपादकका। […]

कविता पद्य साहित्य

अधूरा

यूँ कुछ रोज़ से एक ख्याल आता है मुझको कोई ग़ज़ल जो कहूँ अधूरी रह जाती है गर तस्वीर बनाऊ रंग नहीं मिलते हैं सारे रंग और लफ्ज़ बे-मानी हो जाते हैं जाने कोई गुमान सा मुझ पर छा जाता है शायद मेरा मिजाज़ ही आड़े आ जाते है मैंने काम कोई भी पूरा कहाँ […]

गीत/नवगीत

पीछे ते कूक देत आवत गिरधारी

पीछे ते कूक देत, आवत गिरधारी; परिकम्मा गोवर्धन, देवत त्रिपुरारी ! कीर्तन करि चेतन स्वर, तरत जात गातन गति; मुरली की तान सुनत, केका कानन कूजत ! किसलय उर लय पावत, लता पता फुर होवत; ताल तमालन खोजत, कान्हा जब कछु बोलत ! छिप २ राधा देखत, गोपिन्ह मन की कहवत; कृष्ण सखा मनसुख कूँ, […]

मुक्तक/दोहा

दोहा-मुक्तक

मुश्किल तो होती डगर, चली हुई आसान कठिन मान लेते जिसे, आलस में नादान बड़ी चूक करते सदा, अपनी मंजिल दूर पाँव पसारे सो रहे, वे बिस्तर पादान॥-1 कठिन मानकर जूझते, शेर बहादुर बीर रण में कहाँ विलाशिता, कहती है तस्वीर आँख उठाकर देख लो, मुश्किल पहरा पैर अमर शहीदों को नमन, पथ बेंड़ी जंजीर॥-2 […]

कविता

मैं प्यार हूँ

मैं प्यार हूँ जी हाँ मैं प्यार हूँ, दिल मेरा बसेरा है.. पर आज मैं भटक रहा हूँ यहाँ से वहां , वहां से यहाँ, खा रहा हूँ दर दर की ठोकर, किसी ‘दिल’ की तलाश में , जहाँ मैं पनाह ले सकूं. पर आज जैसे हर इंसान अपने दिल पर ‘हाउस फुल’ का बोर्ड […]

गीत/नवगीत

“चाँद बने बैठे चेले हैं”

सुख के बादल कभी न बरसे, दुख-सन्ताप बहुत झेले हैं! जीवन की आपाधापी में, झंझावात बहुत फैले हैं!! अनजाने से अपने लगते, बेगाने से सपने लगते, जिनको पाक-साफ समझा था, उनके ही अन्तस् मैले हैं! जीवन की आपाधापी में, झंझावात बहुत फैले हैं!! बन्धक आजादी खादी में, संसद शामिल बर्बादी में, बलिदानों की बलिवेदी पर, […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

क्या मनुष्य जीवन का उद्देश्य आधुनिक शिक्षा प्राप्त कर धनोपार्जन कर सुख व सुविधाओं से युक्त जीवन जीना मात्र ही है?

ओ३म् आज का हमारा उपर्युक्त विषय पाठकों को कुछ अटपटा सा लग सकता है। हमें लगता है कि यह विषय विचारणीय है और आज देश व संसार में जो आपाधापी मची है, उसमें प्रत्येक व्यक्ति को इसका न केवल स्वयं चिन्तन करना चाहिये अपितु अपने स्वाध्यायशील मित्रों से भी परामर्श करना चाहिये। आर्यसमाज जाकर यदि […]

लघुकथा

लघु कथा – शान्ति का रसास्वादन

चेतना आज बहुत खुश है, परन्तु उसका दिमाग़ भी ख़लबली मचाए हुए है| लगभग बाईस वर्षों बाद उसके सास-ससुर उसके घर आ रहे हैं| सास-ससुर? हाँ…. हाँ….. वही सास-ससुर, जिन्होंने आज से ठीक बाईस वर्ष पहले उन्हें धक्के मार कर अपने घर से बाहर निकाल दिया था| उस समय उनके पास तन पर कपड़ों के […]

कविता

कविता – जब तलक युग अर्थ-प्रधान रहेगा

जब तलक युग  अर्थ-प्रधान  रहेगा आपसी सम्बन्धों में व्यवधान रहेगा वक्त कितना भी  हो जाए विकसित तन पर भी  नहीं पूरा परिधान रहेगा। जब तलक..युग..अर्थ प्रधान रहेगा॥ उज्जड होगी तब व्यवहार की भाषा मिलेगी न कभी  मानव की परिभाषा आशा भी मत करना कभी  किसी से मानवता का ही होता बलिदान रहेगा। जब तलक..युग..अर्थ प्रधान […]

मुक्तक/दोहा

नीर के दोहे

नीर लिए आशा सदा,नीर लिए विश्वास ! नीर से सांसें चल रही,देवों का आभास !! अमृत जैसा है “शरद”, कहते जिसको नीर ! एक बूंद भी कम मिले,तो बढ़ जाती पीर !! नीर बिना जीवन नहीं,अकुला जाता जीव ! नीर फसल औ’ अन्न है,नीर “शरद” आजीव !! नीर खुशी है,चैन है,नीर अधर मुस्कान ! नीर […]