Monthly Archives: April 2017

  • कविता : मानवता

    कविता : मानवता

    मानवता? ये मानवता क्या होती है बचपन से लेके आज तक हर ऋत हर मौसम देखे ना देखना था वो भी देखा जो देखना था वो भी देखा पर इस मानवता से कभी मुलाक़ात ही नही...