कहानी

…और मैंने सिगरेट शराब सब छोड़ दी!

वैसे सिगरेट पीना मैंने शौक से ही शुरू किया था. ऐसे ही कॉलेज के दिनों में दोस्तों के साथ स्टाइल मारने के लिए! तब सिगरेट के धुंए का छल्ला बनाना और किसी के मुंह पर धुंवा छोड़ना एक शौक था. पिकनिक वगैरह में तो सिगरेट और माचिस की डिबिया मेरी पहचान हुआ करती थी. सिगरेट […]

कुण्डली/छंद

चामर छंद, तोणक, शक्वरी छंद…..

  ?????? कृष्ण को सदैव राधिका रही पुकारती। तृष्ण को सुने न कृष्ण राह थी बुहारती। पीर है बढ़ी चली जिया हुआ अधीर है। मोह बाँसुरी रही दिखा न नैन नीर है। ?????? पूर्व खोह फोड़ झांकती अनंत रश्मियाँ। गूँजने लगे दिगंत नाद ओम घण्टियाँ । आलसी बनो न शारदे सुता अभी सुनो। लेखनी उठाय […]

कविता

सार्वजनिक रूप से केरल में गाय काटकर पकाने की घटना पर एक रचना

गाय हमारी माता है ये, बच्चा बच्चा गाता है। आज वहीं उस मातृभूमि पर, माँ को काटा जाता है। जिसका दूध दही पीकर के, शक्तिमान कहलाता है भूल गया क्या आज समर्पण, बल अपना दिखलाता है। देव तुल्य उस गौ माता की , गर्दन छुरी चलाता है। राम-कृष्ण की पुण्य भूमि पर, क्यों नाहक इतराता […]

कविता

गौ माता

कहाँ गये वो तुर्रमखां जो, नित अवार्ड लौटाते थे असहिष्णुता फैली देश में, नित यह गाने गाते थे कहाँ गए वो बड़े बैरिस्टर, रातों कोर्ट खुलाते थे कोई अच्छा काम देखकर, चैन से सो न पाते थे पशु वध विरोध करने का यह, अजब तरीका पाला है बीच बाजार गौ मैया को, लहूलुहान कर डाला […]

समाचार

दीपक सूफी का नया एल्बम हैं “आ जरा”

  दीपक सूफी का नया एल्बम हैं “आ जरा” लाल बिहारी लाल नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा और हिंदी गीत संगीत दिन प्रतिदिन नई ऊँचाईयों को छू रही है. इसी कड़ी में एक नया नाम जुड़ रहा है नवोदित हिंदी गायक दीपक सूफी का. दीपक सूफी अपना एक नया हिंदी एल्बम लेकर आ रहे हैं जिसका […]

राजनीति

देश की दशा-दिशा

विचारकों और चिंतकों के बीच वर्तमान का ज्वलन्त प्रश्न उभरकर विकरालता का रूप ले रहा हो तो निश्चित ही विचारणीय हो जाता है | तो किसी भी समाजिक विचारकों के लिए आवश्यक हो जाता है कि वर्तमान समस्याओं पर निष्पक्षता से विचार करे और समाधान भी सुझाए | यहां सबसे पहले देश की दशा पर विचार […]

गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल

राह में मील का पत्थर नहीं मिलता, मुद्दतों से कोई रहबर नहीं मिलता, यूँ तो मिलते हैं काफी लोग रोज़ाना, जिसे ढूँढो वही अक्सर नहीं मिलता, संगेमरमर की कब्रें हैं मकां सारे, तेरे शहर में कोई घर नहीं मिलता, जिन्होंने सिखाया था तन के चलना, उन्हीं के कंधों पर अब सर नहीं मिलता, समाया है […]

भजन/भावगीत

गुरु-भजन

सेवा-सिमरन-सत्संग की शुभ राह मुझे दिखलादे                                 6.3.14 जीव नहीं मैं ब्रह्म-स्वरूप हूं यों रहना सिखलादे गुरुवर जय हो तेरी, गुरुवर जय हो तेरी(2)-   1.जैसे पंक से पंकज हो पंकज पर बूंद टिके ना वैसे ही संसार में रह […]

कविता

कविता : उम्र की सुराही से

उम्र  की सुराही से रिस रहा है लम्हा लम्हा बूँद बूँद और हमें मालूम तक नहीं पड़ता ….. कितनी स्मृतियाँ पुरानी किताब के जर्द पन्ने की तरह धूमिल पड़ गई हमें मालूम तक नहीं पड़ता ……. बिना मिले , बिना देखे कितने अनमोल रिश्ते औपचारिकता में तब्दील हो जाते है हमें मालूम तक नहीं पड़ता. […]

कविता

कविता : कश्ती तेरे नाम

इंतजार की कश्ती ये अरमानों की कलम राह-ए-जिन्दगानी में अब न होगी कम ।। मौसम का खुमार ये पवन की बयार चाहत ये पतझड़ में पपिहा करती पुकार ।। अनजाना सा सफर बिन राहो की पहचान राज-ए-राजदार है साथ न छुटेगा हमदम ।। खामोशी का साथ इन लफ्ज़ो का कसूर पलकों मे लम्हों का तूफान […]