लघुकथा

लघुकथा : खनन में खुदे झिनकू भैया

आज तो गजबे हो गया, रात को छोटकी भौजी की आवाज फोन पर सुनाई पड़ी। घबराई हुई थीं, रोते रोते कहने लगीं, बाबू कुछ करो, तुम्हारे भैया को पुलिस पकड़ कर ले गई। का कह रही हो भौजी, झिनकू भैया को पुलिस ले गई। आखिर क्या गुनाह कर दिया मेरे देवता तुल्य भैया ने, कभी चिंटी न मारने वाले, शराफत की जिंदगी जीने वाले, सबका भला चाहने वाले, मानवता के पुजारी का पुलिस से क्या वास्ता पड़ गया। भौजी अब रोना- धोना बंद करो, पहले पूरी बात तो बताओ, मांजरा क्या है किसके इज्जत पर डांका डाल दिया झिनकू भैया ने। लो नछत्तर बाबू सब कुछ साफ़- साफ़ बता दो……बोलो नछत्तर क्या सुन रहा हूँ, दरवाजे पर पुलिस आ गई और भैया को दबोच ले गई, यह क्या तमाशा हो रहा है गाँव में।…….अरे बडक़ू भैया क्या बताएं, बात तो कुच्छू नाही है……परसों अचानक बहुते तेज तेज आन्ही- पानी, धूल- डमरी लिए बड़का तूफ़ान आ गया। बागों में कोई पेड़ साबूत तो नहिये बचा होगा जिनकी डालियाँ न टूटी हों, थोड़े बहुत जो आम के फल लटक रहे थे, धड़ाम से जमीन पर आ गए। घंटे भर की बुढ़िया आन्ही सबको झकझोर कर चली गई और छोड़ गई अपने पीछे खर- पतवार, टूटी हुई टहनियां और उजड़े हुए घर- छप्पर। जिससे लोग बाग़ अब साफ- सफाई करके निजात पाने में लगे हुए हैं। उसी दौरान कीचड़ से लतफत दरवाजे की सहन अपने वजूद पर आकर जोर जोर से फिसलने लगी, आप तो जानते हैं दरवाजे पर बरसात में पानी लग जाता है। गर्मी के खाली खेत पर निगाह गई और झिनकू भैया अपने ही खेत से मिट्टी खुदवा कर दरवाजे पर गिरवाने लगे, ताकि गड्ढ़े से निजात मिल सके कि किसी सज्जन की मुखबीरी से पुलिस हरकत में आ गई और कहने लगी कि खनन पर रोक है और तुम रंगे हाथ पकड़े गए हो। जे सी बी और ट्रॉली के साथ उनका भी चालान कर दिए, कल से लोकअप में बंद हैं। थाने पर कोई सुनने वाला नहीं है, लगता है अब सोमवार को ही कोर्ट खुलने पर पेशी और जमानत होगी। प्रशासन बहुत चुस्त है, कोई सिफारिस विफारिश काम नहीं आ रही है।

आप चिंता न करो, सोमवार को तो जमानत हो ही जाएगी पर दाग तो लग ही गई, झिनकू भैया की नील टिनोपाल वाली चमकती धोती में, हथकड़ी का तोहफा अलग से मिल गया, अब नम्बरदार का तमगा लेकर घूमेंगे अपराधी बनकर……….कैसा अपराधी बे, हलकट कहीं का, जो भी मन में आता है बक देता है……अब लोटा मांजने के लिए मिट्टी के लिए परमिशन लेना पडेगा?, कुम्हार को मिट्टी का परमिट लेना पड़ेगा?, पूजा की बेदी बनाने के लिए आदेश लेना पड़ेगा?, तुलसी जी के चौरा पर मिट्टी डालने के लिए मुंशी, वकील और महकमे का फेरा घूमना पड़ेगा?, उसके बाद ही तुलसी विवाह सम्पन्न होगा। लगता है नियम, कानून की धज्जियाँ उड़ रही है, नियम कुछ और है अमल कुछ और ही हो रहा है। कहीं गाय बछरू चराने वाले हाथ पैर तुड़वा रहे हैं, कहीं भाई बहन एक साथ दिखे तो लैला मजनू बना दिए जा रहे हैं, अब मांटी पर सामत आई है। एक मुट्ठी नमक अधिकार के लिए उठाया गया था, अब एक मुट्ठी मांटी का अधिकार भी न रहा, मांटी से मांटी मिला देने वाले मटमैले मनुज का…….बालू और कोयले पर माफ़िया राज कर गए अब मांटी को बदनाम किया जा रहा है। अच्छाइयों के घर में छोटी बुराई को भी बहुत बढ़ा चढ़ा कर दिखाया जाता है, ताकि दागी जमात की कतार को और भी बढ़ाया जा सके, यह भी एक तरीका है अपने को सही साबित करने का, पर सत्य को दर्पण की जरुरत नहीं होती। झिनकू भैया की मांटी बेदाग़ हैं…….. सबर कर, अब उनका दरवाजा और भी ऊँचा हो जाएगा।

याद आती है वो पंक्तियाँ……..मांटी कहे कुम्हार से तू क्या रौंदे मोहि……एक दिन ऐसा आएगा मैँ रौंदूंगी तोहि……कुछ समझे नच्छत्तर……अब फोन भौजी को पकड़ा……अरे भौजी, इतना क्यों घबरा गई…..भैया कोई मोम के पुतले तो हैं नहीं…..मरद और बरध पर आएं दिन आँच आती रहती है, जलील भी किये जाते रहे हैं पर सोने की तरह तपकर बाहर भी आते रहे हैं और अपनी कीर्ति से कीर्तिमान होते रहे हैं…..धीरज रखों भौजी……सोने पे सुहागा चढ़ा है……गोबर और मांटी के पावन सत्यनारायण भगवान सह गौरी गणेश आप दोनों के साथ पुरे परिवार की रक्षा करें…….ॐ जय गौरी गणेश की……

महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

*महातम मिश्र

शीर्षक- महातम मिश्रा के मन की आवाज जन्म तारीख- नौ दिसंबर उन्नीस सौ अट्ठावन जन्म भूमी- ग्राम- भरसी, गोरखपुर, उ.प्र. हाल- अहमदाबाद में भारत सरकार में सेवारत हूँ