लघुकथा

लघुकथा – नरम दिल तेज स्वभाव

शाम तक शर्मा जी बहुत दुविधा में थे. लेकिन अगली सुबह जब जॉगिंग पार्क से बापस आये तो चेहरे पर बहुत सुकून था. उनके पडोसी शुक्ला जी अपनी बेटी का रिश्ता लेकर आये थे तभी से असमंजस में थे कि रिश्ते को हां करे या न करे, क्योंकि उनकी बेटी स्वभाव से बहुत तेज थी पता नही परिवार में एडजस्ट होगी कि नही.
“क्या बात है बहुत खुश हो “शर्मा जी की पत्नी उनको देखते ही बोली।
“हां…. मेने शुक्ला जी की बेटी के लिए अपने बेटे के लिए हां कर दी “
“पर…. “
“मैं जानता हूँ तुम क्या कहना चाहती हो…. में भी पहले यही सोचता था… लेकिन आज जॉगिंग पार्क में शुक्ला जी अपनी बेटी के साथ मिल गये,,, हम दोनो एक जगह बैठ कर बातें करने लगे उनकी बेटी रनिंग करने लगी, मेने देखा रनिंग प्वाइंट पर बहुत सारी चीटियां अचानक से निकल आती है…. किसी का ध्यान नही था,, और कुछ तो जानबूझकर चीटियों को कुचलते हुये निकल रहे थे. पर जैसे ही चीटियों पर नजर उनकी बेटी की पडी तो बह रूक गई, और सबको एहतियात बरतने को कहने लगी….कि रनिंग करते समय प्लीज चीटियों का ध्यान रखे इन पर पैर न पडने पाये. जो बेटी चीटियों का इतना ख्याल रख सकती है बह इन्सान का कितना रखेगी. उनकी बेटी तेज स्वभाव की जरूर है पर गलत नही,, दिल की नरम है।”
शर्मा जी की बात सुन दोनो के चेहरे पर सूकून और निश्चिंतता थी अपने और अपने बेटे को लेकर।
रजनी

रजनी बिलगैयाँ

शिक्षा : पोस्ट ग्रेजुएट कामर्स, गृहणी पति व्यवसायी है, तीन बेटियां एक बेटा, निवास : बीना, जिला सागर