कविता : कश्ती तेरे नाम

इंतजार की कश्ती
ये अरमानों की कलम
राह-ए-जिन्दगानी में
अब न होगी कम ।।

मौसम का खुमार
ये पवन की बयार
चाहत ये पतझड़ में
पपिहा करती पुकार ।।

अनजाना सा सफर
बिन राहो की पहचान
राज-ए-राजदार है
साथ न छुटेगा हमदम ।।

खामोशी का साथ
इन लफ्ज़ो का कसूर
पलकों मे लम्हों का तूफान
सनम निभाऊँगी हर जनम ।।

ख्वाहिशों का शौर
ये गहराइयों का मोड़
किश्त-दर-किश्त है
जीवन तेरा राहत हें कदम ।।

वक्त का आलम
तुम तन्हाईयों का पैगाम
नजर ये परेशां है
एहसास हें पल-पल जनम ।।

लहरों का सैलाब
ये कश्ती तेरे नाम
सागर भरा पलकों में
पतवार न ठमेगी सनम ।।

— उमा मेहता त्रिवेदी