Monthly Archives: May 2017




  • असीम साहस की जीती-जागती मिसाल

    असीम साहस की जीती-जागती मिसाल

    आज हम आपसे राजेंद्र प्रसाद जी के बारे में बतिया रहे हैं. राजेंद्र प्रसाद जी का नाम आते ही हमारा और आपका ध्यान स्वतंत्र भारत देश के प्रथम राष्ट्रपति स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद जी की ओर जाता...

  • “बज गई शंख”

    “बज गई शंख”

    लघुकथा…… शंख बज गई झिनकू भैया के आँगन में, भौजी के पाँव लाल महावर और भैया की पियरी मने मन खूब मलका रही है। नवुनिया गमछा और अँचरा पकड़े अड़ गई है एक सौ एक रुपैया...

  • “पवित्रा छंद”

    “पवित्रा छंद”

    *शिल्प~ मगण,भगण,सगण* (222, 211, 112), 9 वर्ण, 4 चरण, 2-2 समतुकांत गोरी जागे सपन लिए नैना खोले नमन लिए। भोली भाली सुमन सखी चाहें तेरी चमन सखी।।-1 कोरे कोरे नयन तिरे सीधे साधे पवन झिरे। कैसी...