Monthly Archives: May 2017





  • हे शिवशंकर महादेव प्रभु

    हे शिवशंकर महादेव प्रभु

    हे शिवशंकर महादेव प्रभु, हमको बस तेरा सहारा है तू नैया तू ही खिवैया है, तू ही पतवार-किनारा है- 1.तुम बल-बुद्धि-ज्ञान के सागर हो, अभयंकर हो भय हरते हो हमें बल-बुद्धि-ज्ञान दे अभय करो, हमको बस...

  • मां ने मेरी आस पुजाई

    मां ने मेरी आस पुजाई

    मां ने मेरी आस पुजाई, अम्बे मां की जय-जय बोलो अम्बे मां की जय-जय बोलो, अम्बे मां की जय-जय बोलो- 1.मैंने मां से विनती की थी, कभी तो खुशियां दे दो मां ने तुरंत खज़ाना खोला,...

  • एक कप चाय

    एक कप चाय

    पिछले कई दिनों से न जाने कैसी मंदी बाज़ार में छाई हुई थी| कोई ग्राहक ही नज़र नहीं आता था| ऐसे में प्रातःकाल दूकान को खोल कर बैठना और साँझ तक दो चार चाय अपने पल्ले...

  • “दोहा”

    “दोहा”

    खड़ा हुआ हूँ भाव ले, बिकने को मजबूर बोलो बाबू कित चलू, दिन भर का मजदूर॥-1 इस नाके पर शोर है, रोजगार भरपूर हर हाथों में फावड़ा, पहली मे मशहूर॥-2 महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी


  • कविता : जाति – प्रथा

    कविता : जाति – प्रथा

    अक्षपाद औ’ कणाद  युग में रही नहीं  कभी जाति – प्रथा किसने  किया इसे  अनावृत जो आज बनी है व्यथा-कथा | चार वरण थे व्यवसाय से वर्ण व्यवस्था  तब भी थी अनेकानेक वर्णों से खंडित वर्ण...