Monthly Archives: June 2017

  • प्रेम क्या है ?

    प्रेम क्या है ?

    कैसे कहूँ कि प्रेम क्या है मेरे लिए तो माँ की ममता प्रेम है पिता का धैर्य प्रेम है पति के साथ सानिध्य स्थापित करना शारीरिक मानसिक सम्बंधों की तृप्ति प्रेम है बच्चों के उज्ज्वल भविष्य...

  • रवायतें

    रवायतें

    दिल जार जार है ना जाने किसका इंतजार है , आंखों में हैं आंसूं पर लबों पे इनकार है । बेखुदी है प्यार की या रुसबाइयों का जहर है , इरादों में हमारे आज भी जंग...

  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    भार- 30……. धोखा हुआ उस अभिमन्यु से कौरव कायर विकराली साध सका न ब्यहु रचना को पांडव पुत्र था बलशाली अभी उमर ही क्या थी उसकी धीर बीर रणधीर चला मातु गर्भ अधसुनी कहन अवसर तकता...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    तल्खियाँ दिल से भुलाते तो चमन गुलजार होता । गीत मेरे गूँजते मनमीत का गर प्यार होता ।। वो खुदा फरखुंद उल्फ़त की इबादत से नवाजे । पर चलन कैसा अजूबा रूह का व्यापार होता ।।...


  • गुलाब

    गुलाब

    इश्क़ की कहानी यादों की निशानी किताबों में बंद महका था गुलाब मुरझाया सा अब फिर भी अहसास में भिगोया, आस बन ज़ीस्त में लिपटी इश्क़ की फरियाद आंखो में धुंधली तस्वीर तुम्हारी फीकी सी मुस्कान...