राजनीति

आजादी अपनी सोच में लायें

भारत हर साल 15 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस मनाता है। यह दिन जहां हमारे आजाद होने की खुशी लेकर आता है वहीं इसमें भारत के खण्ड खण्ड होने का दर्द भी छिपा होता है। वक्त के गुजरे पन्नों में भारत से ज्यादा गौरवशाली इतिहास किसी भी देश का नहीं हुआ। लेकिन भारतीय उपमहाद्वीप से ज्यादा सांस्कृतिक राजनैतिक […]

कविता

मरो – मरो परन्तु यों मरो

मरो – मरो परन्तु यों मरो कि मरना तुम्हारा निज राष्ट्र के काम आये मरना तुम्हारा सार्थक हो जाये करो – करो कुछ ऐसा करो कि करना तुम्हारा निज राष्ट्र को समृध्द बना जाये करना तुम्हारा सार्थक हो जाये लड़ो – लड़ो परन्तु यों लड़ो कि लड़ना तुम्हारा निज राष्ट्र की रक्षा कर जाये लड़ना […]

गीतिका/ग़ज़ल

“गज़ल”

बह्र- 2122, 2122, 2122 212, काफ़िया-औना, रदीफ़- दे गए…..ॐ जय माँ शारदे……. जानकर अंजान को तुम जो खिलौना दे गए तोड़कर अरमान इसका कर भगौना दे गए दिल कहे कि पूछ लो हाथ कितने साथ थे ले के आए आप अरमा औ बिछौना दे गए॥ खेलना है नियति जिसकी झूमकर जो खेलते टूटकर बिखरे हैं […]

संस्मरण

संस्मरण : नागपंचमी और नवान्न (नेवान)

गौतम गोत्रीय मिश्र परिवार का पुस्तैनी गाँव भरसी बुजुर्ग आज भी उन तमाम रीतियों, परंपराओं और संस्कारों को उसी रूप संजोए हुए है जिस रूप में पूर्वजों की रहनी करनी शदियों से चलती आई है। अगर कुछ बदला है तो वे हैं मिट्टी के दीवारों वाले कच्चे मकानों की जगह ईंट के पक्के मकान, जो […]

कविता

“वेगवती छंद”

विधान~ 4 चरण,2-2 चरण समतुकांत। विषम पाद- सगण सगण सगण गुरु(10वर्ण) 112 112 112 2 सम पाद-भगण भगण भगण गुरु गुरु(11वर्ण) 211 211 211 2 2….. नभ झूम उठे तिन देखो बेबस डाल झुके उन देखो।। बह वेग चले वन देखो है तपती अवनी सुधि लेखो।। सुन साजन बाहर आओ है पुरबी पवना दुलराओ।। अपने […]

गीत/नवगीत

देख तमाशा कुर्सी का

देख तमाशा कुर्सी का घर में घमासान मच गया, बाप बेटे का द्वन्द हो गया। अपनी अपनी पकेगी खिचडी, भण्डारा अब बन्द हो गया। मै तो एक कुर्सी हूं अलंकार न कोई मुझमें, फिर मेरी गजब की शोभा- न मै रंभा, न मै मेनका, न मै उर्वसी जैसी हॅू मै तो एक कुर्सी हूं घर […]

गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल

अपने कौन, बेगाने कौन, किस्से छेड़े पुराने कौन सबको चाहत खुशियों की, गम से करे याराने कौन खुद से ही हम रूठ गए हैं, आए हमें मनाने कौन कीमत है यहाँ चेहरों की, दिल के दर्द को जाने कौन गज़ब की उनकी तीरंदाजी, नज़रें कहाँ, निशाने कौन पैसे वालों की महफिल में, मुफलिस को पहचाने […]

भजन/भावगीत

मेरी विनती सुनो हे अविनाशी

मेरी विनती सुनो हे अविनाशी, मेरी विनती सुनो हे अविनाशी मंगल कर दो, झोलियां भर दो, हे शंकर हे कैलाशी- मेरी विनती—– 1.तुम जानो मेरी किसमें भलाई, कहलाते घट-घट वासी- 2.आनंद की वर्षा प्रभु कर दो, हे आनंदघन सुखराशि- 3.सद्गुणमय जीवन को कर दो, हे सद्गुणमय दुःखनाशी- 4.अपनी लगन दो, शक्ति से भर दो, मन […]

इतिहास

दिव्यांगों के आदर्श – श्री बच्चू सिंह (भाग 3)

बात तब की है, जब 1946 में कम्युनिस्ट, लीग, कांग्रेस, एससीएफ (शिड्यूल कास्ट फेडरेशन) के राजनीतिक विरोध और संचार पोत ‘तलवार’ पर मदनसिंह व मोहम्मद शरीफ की गद्दारी से क्रांति असफल होने के बाद ब्रिटिश राज फिर मजबूत हो चुका था। तलवार पोत पर आजाद हिन्द का जासूस 17 वर्षीय रेटिंग बलाई चंद दत्त था, […]

गीत/नवगीत

उठाई तो कंगाल थी प्याली

जिसको मैने दवाई समझी, उसी ने खतरे में जान डाली। जिसे खजाना समझ रहे थे, खोला तो निकला वो खाली जिसको मैनें दवाई…………..तो निकला वो खाली खानदानी रईश समझे, काफी सोहरत दिखी थी उनकी। चर्चे में बस वही थे शामिल, बज्में भी महफिलें थी उनकी। मिजाज उनका, लहजा उनका, नई तिजारत बता रही है- फूलों […]