Monthly Archives: July 2017



  • “गज़ल”

    “गज़ल”

    बह्र- 2122, 2122, 2122 212, काफ़िया-औना, रदीफ़- दे गए…..ॐ जय माँ शारदे……. जानकर अंजान को तुम जो खिलौना दे गए तोड़कर अरमान इसका कर भगौना दे गए दिल कहे कि पूछ लो हाथ कितने साथ थे...


  • “वेगवती छंद”

    “वेगवती छंद”

    विधान~ 4 चरण,2-2 चरण समतुकांत। विषम पाद- सगण सगण सगण गुरु(10वर्ण) 112 112 112 2 सम पाद-भगण भगण भगण गुरु गुरु(11वर्ण) 211 211 211 2 2….. नभ झूम उठे तिन देखो बेबस डाल झुके उन देखो।।...

  • देख तमाशा कुर्सी का

    देख तमाशा कुर्सी का

    देख तमाशा कुर्सी का घर में घमासान मच गया, बाप बेटे का द्वन्द हो गया। अपनी अपनी पकेगी खिचडी, भण्डारा अब बन्द हो गया। मै तो एक कुर्सी हूं अलंकार न कोई मुझमें, फिर मेरी गजब...

  • गज़ल

    गज़ल

    अपने कौन, बेगाने कौन, किस्से छेड़े पुराने कौन सबको चाहत खुशियों की, गम से करे याराने कौन खुद से ही हम रूठ गए हैं, आए हमें मनाने कौन कीमत है यहाँ चेहरों की, दिल के दर्द...

  • मेरी विनती सुनो हे अविनाशी

    मेरी विनती सुनो हे अविनाशी

    मेरी विनती सुनो हे अविनाशी, मेरी विनती सुनो हे अविनाशी मंगल कर दो, झोलियां भर दो, हे शंकर हे कैलाशी- मेरी विनती—– 1.तुम जानो मेरी किसमें भलाई, कहलाते घट-घट वासी- 2.आनंद की वर्षा प्रभु कर दो,...

  • परी आयी

    सोये बच्चों, झट उठ जाओ बिस्तर छोड़ो, बाहर आओ नभ से परी उतर के आयी देखो संग वह क्या-क्या लायी सोने जैसे पंख निराले हाथों जादू छड़ी सम्हाले रंग-बिरंगा पहने चोला गोरा तन, मुखड़ा है भोला...