नकलची बन्दर

नकलची बन्दर

जंगल में एक सिंह रहता था। जंगल बहुत विशाल और घना था। दिन में भी भय के कारण वहां कोई ना फटकता था। सिंह भी बड़ा डरावना था। यदि एक बार शिकार पर नजर पड़ जाये तो बिना मारे चैन न लेता। इसीलिए जंगल के छोटे-बढ़े सभी जानवर उससे भयभीत रहते थे। इधर सिंह का निकलना होता था कि उधर दूसरे जानवरों का भाग-भाग कर छुपना। सिंह जानवरों के माaस का बड़ा शौकीन था।प्रत्येक बार ताजा षिकार करके खाता।

इसी जंगल के दक्षिणी किनारे पर एक नदी थी। शिकार खाने के बाद सिंह उसमे पानी पीने जाया करता था। उसका आतंक इतना बढ़ गया था कि जंगल के जानवर नदीं मे पानी पीने के लिए आने को भी डरने लगे थे। कभी-कभी अपनी ही छाया पानी में देखकर सिंह समझ जाते थे।
जंगल में ऐसा कब तक चलेगा। इस तरह की मनमानी कब रुकेगी। जैसी बातें सभी जानवरों में शुरु हुई। बुर्जुग जानवरों की सलाह पर समस्या का समाधान करने के लिए पूरी तरह से सुरक्षित स्थान पर सभा बुलाई गई। सभा में निश्चय हुआ किः- एक जानवर हम लोंगो का दूत बनकर सिंह के पास जायेगा और समझायेगा कि इस तरह जंगल में आतंक फैलाना ठीक नहीं हैं। आप जंगल के राजा हैं ताकतवर हैं पर दूसरांas का ध्यान रखना भी आपका कत्र्तव्य हैं।यदि आप इसी तरह का व्यवहार जारी रखेंगे तो हम सब मिलकर युद्ध करेंगे या दूसरे किसी जंगल में चलें जायेंगे।

योजना के अनुसार नकलची बन्दर को सिंह के पास दूत बनाकर भेजा गया। क्योंकि वह बुद्धिमान तो था ही क्रोध में सिंह से भी रक्षा कर सकता था।बन्दर ने दूर से ही सिंह को नमस्कार किया आश्र उसके सामने जाकर बैठ गया।
नकलची बदर को इस तरह शान्त बैठा देखकर सिंह को आष्चर्य हुआ। वह बोला—अरे बन्दर! तू आज इतना शान्त क्यों बैठा हैं तेरी तो आदत हैं उछल कूद करने की।

महाराज आदत है तो किसी भी आदत को छोड़ा नहीं जा जा सकता

‘ बात तो ठीक हैं तुम्हारी कोशिश करने से क्या कठिन रह जाता है। असली बात बतलाओ। आज तुम किसलियें आये हो।सिंह ने पूछते हुए कहा
महाराज कल हम सभी जानवरों ने एक सभा की थी। जिसमें यह निश्चय किया गया कि सभी अपनी-अपनी गन्दी आदतें छोड़ेंगे। तथा ऐसा कोई काम नहीं करेंगे जिससे जंगल के दूसरे जानवरों को परेशानी हो। इसीलिए मैं यहा आकर चुप-चाप बैठ गया।
अच्छा तो यह बात है अब मुझे बताओ क्या करना है! सिंह ने पूछा।
महाराज हमारी तरह आप भी शान्त हो जाइये। जंगल के छोटे-छोटे जानवरों को आवश्यक दहाड़कर डराना छोड़ दीजिये तथा उतना ही शिकार कीजिये जितनी आवश्यकता हो ।

ठीक है नकलची बन्दर मैं कोशिश करुँगा।यदि खून और माँस से अच्छी कोई चीज मिले तो लाना। अच्छा महाराज अब मैं चलता हूँ। बन्दर ने वापस लौटते हुए कहा

नकलची बन्दर के बुद्धि कौशल ने सिंह का स्वभाव ही बदल दिया और जानवरों का शिकार भी जरुरत भर ही करता
एक दिन नकलची बन्दर अपने दोनों हाथों में एक – एक पका आम लेकर सिंह के पास गया और बोला–
महाराज यह ऐसा फल है जिसे दुनियां फलों का राजा कहती है । इसका रस किसी जानवर के खून से ज्यादा मीठा होता है ।इसे खाओ और फिर देखो जंगल के राजा की दोस्ती फलों के राजा से कैसी होती है ।
लाल पके आमों का स्वाद चखकर सिंह उछल पड़ा वह बोला वास्तव मे इसका रस खून से मीठा है ।जाओ जंगल के जानवरों से कह दो कि आज से जंगल के राजा की दोस्ती फलां के राजा आम से हो गई है और वह आज से खून व माँस नहीं मीठे फल खायेगा ।

फिर बन्दर सिंह की बात जंगल मे आग की तरह फैल गई ।

जंगल के सभी जानवर बहुत प्रसन्न हुए ।सभी एक साथ घूमने फिरने लगे।नकलची बन्दर भी सिंह के लिये प्रति दिन पके फल पहुंचाने लगा ।

परिचय - शशांक मिश्र भारती

नामः-शशांक मिश्र ‘भारती’ आत्मजः-स्व.श्री रामाधार मिश्र आत्मजाः-श्रीमती राजश्ेवरी देवी जन्मः-26 जुलाई 1973 शाहजहाँपुर उ0प्र0 मातृभाषा:- हिन्दी बोली:- कन्नौजी शिक्षाः-एम0ए0 (हिन्दी, संस्कृत व भूगोल)/विद्यावाचस्पति-द्वय, विद्यासागर, बी0एड0, सी0आई0जी0 लेखनः-जून 1991 से लगभग सभी विधाओं में प्रथम प्रकाशित रचना:- बदलाव, कविता अक्टूबर 91 समाजप्रवाह मा0 मुंबई तितली - बालगीत, नवम्बर 1991, बालदर्शन मासिक कानपुर उ0प्र0 प््राकाशित पुस्तकेंः-हम बच्चे (बाल गीत संग्रह 2001) पर्यावरण की कविताएं ( 2004) बिना बिचारे का फल (2006) क्योे बोलते है बच्चे झूठ (निबध-2008)मुखिया का चुनाव (बालकथा संग्रह-2010) आओ मिलकर गाएं(बाल गीत संग्रह 20011) दैनिक प्रार्थना(2012)माध्यमिक शिक्षा और मैं (निबन्ध2015) पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशन -जून 1991 से हास्य अटैक, रूप की शोभा, बालदर्शन, जगमग दीपज्योति, देवपुत्र, विवरण, नालन्दा दर्पण, राष्ट्रधर्म, बाल साहित्य समीक्षा, विश्व ज्योति, ज्योति मधुरिमा, पंजाब सौरभ, अणुव्रत, बच्चांे का देश, विद्यामेघ, बालहंस, हमसब साथ-साथ, जर्जर कश्ती, अमर उजाला, दैनिक जनविश्वास, इतवारी पत्रिका, बच्चे और आप, उत्तर उजाला, हिन्दू दैनिक, दैनिक सबेरा, दै. नवज्योति, लोक समाज, हिन्दुस्तान, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण, बालप्रहरी, सरस्वती सुमन, बाल वाटिका, दैनिक स्वतंत्र वार्ता, दैनिक प्रातः कमल, दैं. सन्मार्ग, रांची एक्सप्रेस, दैनिक ट्रिब्यून, दै.दण्डकारण्य, दै. पायलट, समाचार जगत, बालसेतु, डेली हिन्दी मिलाप उत्तर हिन्दू राष्ट्रवादी दै., गोलकोण्डा दर्पण, दै. पब्लिक दिलासा, जयतु हिन्दू विश्व, नई दुनिया, कश्मीर टाइम्स, शुभ तारिका, मड़ई, शैलसूत्र, देशबन्धु, राजभाषा विस्तारिका, दै नेशनल दुनिया सहित देश भर की दो सौ से अधिक दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक, मासिक, द्वैमासिक, त्रैमासिक, अर्द्धवार्षिक व वार्षिक पत्र-पत्रिकाओं में अनवरत। अन्तर जाल परः- 12 अगस्त 2010 से रचनाकार, साहित्य शिल्पी, सृजनगाथा, कविता कोश, हिन्दी हाइकु, स्वर्गविभा, काश इण्डिया ,मधेपुरा टुडे, जय विजय, नये रचनाकार, काव्यसंकलन ब्लाग, प्रतिलिपि आदि में सितम्बर 15 तक 600। ब्लागसंचालन:-हिन्दीमन्दिरएसपीएन.ब्लागपाट.इन परिचय उपलब्ध:-अविरामसाहित्यिकी, न्यूज मैन ट्रस्ट आॅफ इण्डिया, हिन्दी समय मा. बर्धा, हिन्दुस्तानी मीडियाडाटकाम आदि। संपादन-प्रताप शोभा त्रैमा. (बाल साहित्यांक) 97, प्रेरणा एक (काव्य संकलन 2000), रामेश्वर रश्मि (विद्यालय पत्रिका 2003-05-09), अमृतकलश (राष्ट्रीय स्तर का कविता संचयन-2007), देवसुुुधा (प्रदेशस्तरीय कविता संचयन 2009),देवसुधा (अ भा कविता संचयन 2010), देवसुधा-प्रथम प्रकाशित कविता पर-2011,देवसुधा (अभा लघुकथा संचयन 2012), देवसुधा (पर्यावरण के काव्य साहित्य पर-2013) आजीवन.सदस्य/सम्बद्धः-नवोदित साहित्यकार परिषद लखनऊ-1996 से -हमसब साथ-साथ कला परिवार दिल्ली-2001 से -कला संगम अकादमी प्रतापगढ़-2004 से -दिव्य युग मिशन इन्दौर-2006 से -नेशनल बुक क्लव दिल्ली-2006 से -विश्व विजय साहित्य प्रकाशन दिल्ली-2006 से -मित्र लोक लाइब्रेरी देहरादून-15-09-2008 से -लल्लू जगधर पत्रिका लखनऊ-मई, 2008 से -शब्द सामयिकी, भीलबाड़ा राजस्थान- -बाल प्रहरी अल्मोड़ा -21 जून 2010 से संस्थापकः-प्रेरणा साहित्य प्रकाशन-पुवायां शाहजहांपुर जून-1999 सहसंस्थापक:-अभिज्ञान साहित्यिक संस्था बड़ागांव, शाहजहांपुर 10 जून 1991 प्रसारणः- फीबा, वाटिकन, सत्यस्वर, जापान रेडियो, आकाशवाणी पटियाला सहयोगी प्रकाशन- रंग-तरंग(काव्य संकलन-2002), शहीदों की नगरी के काव्य सुमन-1997, प्यारे न्यारे गीत-2002, मेरा देश ऐसा हो-2003, सदाकांक्षा-2004-4, प्रतिनिधि लघुकथायें-2006, काव्य मंदाकिनी-2007, दूर गगन तक-2008, काव्यबिम्ब-2008, ये आग कब बुझेगी-2009, जन-जन के लिए शिक्षा-2009 काव्यांजलि 2012 ,आमजन की बेदना-2010, लघुकथा संसार-2011, आईना बोल उठा-2012, वन्देमातरम्-2013, सुधियों के पल-2013, एक हृदय हो भारत जननी-2015 आदि शताधिक संकलनों, शोध, शिक्षा, परिचय ग्रन्थों में। परिशिष्ट/विशेषांकः-शुभतारिका मा0 अम्बाला-अप्रैल-2010 सम्मान-पुरस्कारः-स्काउट प्रभा बरेली, नागरी लिपि परिषद दिल्ली, युगनिर्माण विद्यापरिषद मथुरा, अ.भा. सा. अभि. न. समिति मथुरा, ए.बी.आई. अमेरिका, परिक्रमा पर्यावरण शिक्षा संस्थान जबलपुर, बालकन जी वारी इण्टरनेशनल दिल्ली, जैमिनी अकादमी पानीपत, विन्ध्यवासिनी जन कल्याण ट्रस्ट दिल्ली, वैदिक का्रंति परिषद देहरादून, हमसब साथ-साथ दिल्ली, अ.भा. साहित्य संगम उदयपुर, बालप्रहरी अल्मोड़ा, राष्ट्रीय राजभाषा पीठ इलाहाबाद, कला संगम अकादमी प्रतापगढ़, अ. भा.राष्ट्रभाषा विकास संगठन गाजियाबाद, अखिल भारतीय नारी प्रगतिशील मंच दिल्ली, भारतीय वाङ्मय पीठ कोलकाता, विक्रमशिला विद्यापीठ भागलपुर, आई.एन. ए. कोलकाता हिन्दी भाषा सम्मेलन पटियाला आदि सात दर्जन संस्था-संगठनों से। सहभागिता-राष्ट्रीय-अन्तराषर््ट्रीय स्तर की एक दर्जन से अधिक संगोष्ठियों सम्मेलनों-जयपुर, दिल्ली, प्रतापगढ़, इलाहाबाद, देहरादून, अल्मोड़ा, भीमताल, झांसी, भागलपुर, मसूरी, ग्वालियर, उधमसिंह नगर, पटियाला आदि में। विशेष - नागरी लिपि परिषद, राजघाट दिल्ली द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर वरिष्ठ वर्ग निबन्ध प्रतियोगिता में तृतीय पुरस्कार-1996 -जैमिनी अकादमी पानीपत हरियाणा द्वारा आयोजित तीसरी अ.भा. हाइकु प्रतियोगिता 2003 में प्रथम स्थान -हम सब साथ-साथ नई दिल्ली द्वारा युवा लघुकथा प्रतियोगिता 2008 में सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुति सम्मान। -सामाजिक आक्रोश पा. सहारनपुर द्वारा अ.भा. लघुकथा प्रति. 2009 में सराहनीय पुरस्कार - प्रेरणा-अंशु द्वारा अ.भा. लघुकथा प्रति. 2011 में सांत्वना पुरस्कार --सामाजिक आक्रोश पाक्षिक सहारनपुर द्वारा अखिल भारतीय लघुकथा प्रतियोगिता-2012 में सराहनीय पुरस्कार -- जैमिनी अकादमी पानीपत हरियाणा द्वारा आयोजित 16 वीं अ.भा. हाइकु प्रतियोगिता 2012 में सांत्वना पुरस्कार स्ंाप्रति -प्रवक्ता संस्कृत:-राजकीय कालेज स्थायी पताः- हिन्दी सदन बड़ागांव, शाहजहांपुर - 242401 उ0प्र0 दूरवाणी:- 9410985048, 9634624150/9634624150 ईमेलः- shashank.misra73@rediffmail.com