भजन/भावगीत

शिव भजन- तारकासुर-वध

तारकासुर को मारने वाले, हे परमेश्वर स्वामी
सबकी रक्षा करते हो तुम, घट-घट अंतर्यामी
भगवन जय हो तेरी, भगवन जय हो तेरी (2)

 

1.जब-जब धर्म की हानि होती, अधर्म है शीश उठाता
तब-तब दानव को दलने, परमेश्वर तू है आता
भगवन जय हो तेरी, भगवन जय हो तेरी (2)

 

2.युग-युग से तुम धर्म की खातिर, रूप अनेक ह धरते
मुरली बजाते, धनुष उठाते, डमरू से डम-डम करते
भगवन जय हो तेरी, भगवन जय हो तेरी (2

 

3.मानव जब दानव बन जाता, जग को कष्ट दे भारी
तेरे एक इशारे से मिट जाती दुविधा सारी
भगवन जय हो तेरी, भगवन जय हो तेरी (2

 

4.तुम ही तप से खुश होकर वरदान सभी को देते
लेकिन वर से कष्ट दे जो उसकी शक्ति हर लेते
भगवन जय हो तेरी, भगवन जय हो तेरी (2

 

(तर्ज़- विनय सुनो हे स्वामी सबका जीवन-धन सरसाओ——–)

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।

One thought on “शिव भजन- तारकासुर-वध

  1. आदरणीय बहनजी ! बेहद सुंदर भजन के लिए धन्यवाद ।

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