उठाई तो कंगाल थी प्याली

जिसको मैने दवाई समझी, उसी ने खतरे में जान डाली।
जिसे खजाना समझ रहे थे, खोला तो निकला वो खाली
जिसको मैनें दवाई…………..तो निकला वो खाली

खानदानी रईश समझे, काफी सोहरत दिखी थी उनकी।
चर्चे में बस वही थे शामिल, बज्में भी महफिलें थी उनकी।
मिजाज उनका, लहजा उनका, नई तिजारत बता रही है-
फूलों के कातिल वो निकले, दुनियां कहती है उनको माली
जिसको मैने दवाई……………तो निकला वो खाली

नजर मिला के नजर चुराये कोई सियासत जरूर होगी।
दौलत उनकी देख के लगता, उजड़ी, रियासत कोई तो होगी।
कहते थे हम चल नहीं सकते, दौड के निकल गये वो आगे-
पीने को अब तक थे कहते, उठाई तो कंगाल थी प्याली।
जिसको मैने दवाई…………..तो निकला वो खाली

हवा से दामन उड़ा क्या उनका, चेहरे पे चेहरे थे उनके।
कई कजाएं की थी जिसने, शरीफों में किस्से थे उनके।
समझ सके न गहरे राज को शबनम भी हीरे जैसा-
जिनको पढ़कर बढ़े थे आगे, किताबें मैने जला वो डाली।
जिसको मैने दवाई……………तो निकला वो खाली
राजकुमार तिवारी (राज)

परिचय - राज कुमार तिवारी (राज)

संवाददाता बाराबंकी उत्तर प्रदेश मो० 9984172782 इनका जन्म बाराबंकी जिले के जयचन्द्रपुर गांव के एक किसान के घर 1988 में हुआ था। इन्होने शिक्षा शास्त्र से परास्नाक की उपाधि प्राप्त की। इनको बचपन से ही लिखने का बड़ा ही शौख था, 15 वर्ष की आयु से ही इन्होने लिखना शुरू कर दिया था। 1998 से 2014 तक दूर दर्शन केन्द्र की मासिक पत्रिका से व लखनऊ से प्रकाशित होनेे वाली अन्य प्रत्रिका व समाचार पत्रों में भी स्थान प्राप्त किया। इनका कलम चलाने का सिलसिला अभी जारी है।