कविता

मरो – मरो परन्तु यों मरो

मरो – मरो परन्तु यों मरो कि मरना तुम्हारा
निज राष्ट्र के काम आये
मरना तुम्हारा सार्थक हो जाये

करो – करो कुछ ऐसा करो कि करना तुम्हारा
निज राष्ट्र को समृध्द बना जाये
करना तुम्हारा सार्थक हो जाये

लड़ो – लड़ो परन्तु यों लड़ो कि लड़ना तुम्हारा
निज राष्ट्र की रक्षा कर जाये
लड़ना तुम्हारा वीरता कहलाये

बनो – बनो कुछ ऐसा बनो कि बनना तुम्हारा
निज राष्ट्र का विकास हो जाये
बनना तुम्हारा सार्थक हो जाये

निभाओ – निभाओ कि निभाना तुम्हारा
निज राष्ट्र को समर्पित फर्ज कहलाये
निभाना तुम्हारी वफादारी बन जाये

मरो – मरो परन्तु यों मरो कि मरना तुम्हारा
निज राष्ट्र के काम आये
मरना तुम्हारा सार्थक हो जाये

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा
गॉव रिहावली, डाक तारौली गुर्जर,
फतेहाबाद-आगरा 283111

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

नाम - मुकेश कुमार ऋषि वर्मा एम.ए., आई.डी.जी. बाॅम्बे सहित अन्य 5 प्रमाणपत्रीय कोर्स पत्रकारिता- आर्यावर्त केसरी, एकलव्य मानव संदेश सदस्य- मीडिया फोरम आॅफ इंडिया सहित 4 अन्य सामाजिक संगठनों में सदस्य अभिनय- कई क्षेत्रीय फिल्मों व अलबमों में प्रकाशन- दो लघु काव्य पुस्तिकायें व देशभर में हजारों रचनायें प्रकाशित मुख्य आजीविका- कृषि, मजदूरी, कम्यूनिकेशन शाॅप पता- गाँव रिहावली, फतेहाबाद, आगरा-283111