Monthly Archives: August 2017


  • मैं तिरंगा हूँ…!

    मैं तिरंगा हूँ…!

    मैं तिरंगा हूँ…!! कल रास्ते में मुझे कोई मिला, वह कल 16 अगस्त – 27 जनवरी कुछ भी हो सकता है। नहाया हुआ था वह धूल में, लतपत मिट्टी से सना हुआ, मैंने पूछा महाशय आप कौन हैं और क्यों...

  • खामोश हूँ मैं ,

    खामोश हूँ मैं ,

    खामोश हूँ मैं , अब शिकायत नहीं होती, अब इस ज़माने में , किसी का ‘दिल’ समझने की ‘रिवायत ‘ ही नहीं होती , खामोश हूँ मैं , क्यों की मैं लड़ता नहीं झूठों के झमेले...



  • गज़ल

    गज़ल

    सपने जैसा किसी के दिल में पलता रहता हूँ, अपनी लौ में अक्सर खुद ही जलता रहता हूँ थक जाता हूँ दिन भर की जब दौड़ भाग से मैं, किसी शाम के सूरज सा बस ढलता...



  • अंधविश्वास

    अंधविश्वास

    रमेश और रत्नाकर अच्छे मित्र थे । दोनों के घर भी ठीक आमने सामने ही थे । दोनों ने साथ ही शिक्षा ग्रहण की थी और अलग अलग कंपनियों में अच्छी पोस्ट पर काम भी कर...

  • पिरामिड

    पिरामिड

    “पिरामिड” (1) ये भूख भरम विलासिता धर्म की छाँव है जश्ने बहार भीड़ अपरंपार।। (2) ये कुंठा कल्पना दुष्ट स्वभाव कलुषित राह छलनी हुई श्रद्धा।। (3) रे मन मूरख आँखे खोल लालच छोड़ साधु मंशा स्नेह...