इतिहास

गायत्री मन्त्र के जप से मन्द बुद्धि बालक विख्यात विद्वान बना

महात्मा आनन्द स्वामी जी (पूर्व आश्रम का नाम खुशहाल चन्द) का नाम आज भी प्रायः प्रत्येक आर्यसमाज का सक्रिय अनुयायी जानता है। आपके प्रवचन पुस्तक रूप में प्रकाशित मिलते हैं जिन्हें लोग बहुत श्रद्धा से पढ़ते हैं। इन्हें पढ़कर कोई भी व्यक्ति वैदिक मान्यताओं व सिद्धान्तों का जानकार बन सकता है। जो भी पढ़ेगा उसका […]

कविता पद्य साहित्य

मैं तिरंगा हूँ…!

मैं तिरंगा हूँ…!! कल रास्ते में मुझे कोई मिला, वह कल 16 अगस्त – 27 जनवरी कुछ भी हो सकता है। नहाया हुआ था वह धूल में, लतपत मिट्टी से सना हुआ, मैंने पूछा महाशय आप कौन हैं और क्यों इस तरह यहाँ पड़े हैं। ‘पड़े हैं’ यह शब्द तथाकथित बुद्धिजीवियों को खटकेगा, जब उस शख्स का नाम पता […]

कविता

खामोश हूँ मैं ,

खामोश हूँ मैं , अब शिकायत नहीं होती, अब इस ज़माने में , किसी का ‘दिल’ समझने की ‘रिवायत ‘ ही नहीं होती , खामोश हूँ मैं , क्यों की मैं लड़ता नहीं झूठों के झमेले में पड़ता नहीं, मेरी ख़ामोशी ही मेरा उपचार है, ‘खता’ भूलने में ही उपकार है, मेरी यह ख़ामोशी ही […]

हास्य व्यंग्य

हास्य-व्यंग्य : ट्रैन का डब्बा और ज्ञानी पुरुष

सफर का मजा लेना हो तो सामान कम रखिये ॥ जिंदगी का मजा लेना हो तो अरमान कम रखिये ॥ मुझे इसमें थोड़े संशोधन की जरूरत महसूस हुई । सफर का मजा लेना हो तो ट्रैन की सामान्य श्रेणी में चलिए ॥ देश के हालात की असली तस्वीर के लिए इनमे सफर करते ज्ञानियों से मिलिए ॥ वैसे तो […]

इतिहास

संतो के संत बाबूजी महाराज (भाग – २ )

३१ अक्टूबर १९४४ ; लालाजी (बाबूजी के गुरु जी) को चेतना के सभी स्तरों पर अधिकार था । जागृत अथवा सुप्त अवस्था में भी वह काम करते थे । मुझे कार्य करने के लिए वही क्षमता दी गयी । १ नवम्बर १९४४ : लालाजी ने बताया तुम वह यंत्र हो जो प्रकृति को निर्बल या […]

गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल

सपने जैसा किसी के दिल में पलता रहता हूँ, अपनी लौ में अक्सर खुद ही जलता रहता हूँ थक जाता हूँ दिन भर की जब दौड़ भाग से मैं, किसी शाम के सूरज सा बस ढलता रहता हूँ भर ना जाएं कहीं ये खुद ही वक्त की मरहम से, दिल के ज़ख्मों पर नमक मैं […]

भाषा-साहित्य

वैश्विक परिदृश्य में हिंदी : एक अवलोकन

इक्कीसवीं सदी ‘विश्व समाज’ की संकल्पना को साकार करने की सदी है. आज सारा जगत एक ही सूत्र में बन्ध रहा है. यह सूत्र जिस विचार धारा के लिए प्रवाहमान है. यह विचार धारा है ‘आधुनिकीकरण’ की विचारधारा . जो सारे वैश्विक समाज का ताना-बाना बुनती है. जो वैश्विक समाज की संकल्पना को मूर्त रूप […]

इतिहास

आर्य संस्कृति के प्रबल प्रचारक : लाला रामजस

भारतीय समाज एक काल में वेदों के ज्ञान को भूल गया। इसका परिणाम यह हुआ कि वह या तो भाग्यवादी बन बैठा अथवा यथार्थ जगत को मिथ्या समझ बैठा। इस कारण से परिश्रम करने के स्थान पर निष्क्रिय जीवन यापन करने लगा। यही मानसिकता से विदेशियों का हमारे देश पर राज्य हो गया। ऐसे विकट […]

लघुकथा

अंधविश्वास

रमेश और रत्नाकर अच्छे मित्र थे । दोनों के घर भी ठीक आमने सामने ही थे । दोनों ने साथ ही शिक्षा ग्रहण की थी और अलग अलग कंपनियों में अच्छी पोस्ट पर काम भी कर रहे थे । यद्यपि दोनों बहुत अच्छे मित्र थे लेकिन उनके विचार एक दुसरे से भिन्न थे । अक्सर […]

कविता

पिरामिड

“पिरामिड” (1) ये भूख भरम विलासिता धर्म की छाँव है जश्ने बहार भीड़ अपरंपार।। (2) ये कुंठा कल्पना दुष्ट स्वभाव कलुषित राह छलनी हुई श्रद्धा।। (3) रे मन मूरख आँखे खोल लालच छोड़ साधु मंशा स्नेह रूप बहुरूपिया।। (4) न बना घरौंदा अंधे कूप विषैले सांप बिगड़ता पानी जन्म जीव मंथन।। (5) ये जेल सलाखे […]