बारीश के दिनों में पत्तेदार सब्जियों से बचें

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अपनी धार्मिक मान्यताओं का सम्मान करें और उन्हें अपने आचरण में भी लाएं, अपनी प्यारी संतानों को धन दौलत देना है, तो देते रहना,
परन्तु सेहत के ये धार्मिक मान्यताओं के साथ जोड़े गए रहस्य प्राथमिकता के साथ, अच्छे से दिलोदिमाग में पहले स्थापित करते रहना, अन्यथा वंश का अंश भी नहीं बचेगा.
होटलों में कौन देखता है कि सब्जियों के पत्तों में कौन कौन से जीव जन्तु चिपके हुए हैं, सांप तो कुछ बड़ा भी होता है, छोटे छोटे तो कटने के बाद दिखने से रहे. यह भी याद रखें, उन कीड़ों के मरने के बाद भी उनमें मौजूद जहरीले टाक्सिन किसी ना किसी रूप में

विद्यमान रहते हैं. मेरे कुछ जैन मित्र मेरा मजाक उड़ाते हुए कहते हैं, यार तुम तो डॉक्टर हो, तुम्हारी दकियानूसी अभी भी नहीं गयी है, तुम तो खुद भी जानते हो कि सब्जी उबलने के बाद सारे रोगाणु और कीड़े मर जाते हैं, पूरी तरह स्टर्लाइज होकर खाने योग्य हो जाती है.
मेरा निवेदन है, विनम्र आग्रह है कि जब हम छिपकली के बारे में जानते हैं कि उसकी त्वचा में टाक्सिन होते हैं, तो क्या हम सभी ने दूसरे तमाम कीड़ों की निरापदता की जांच करवा रखी है ? अभी कुछ माह पहले मुम्बई में एक परिवार ने पालक की सब्जी में सांप का बच्चा खा लिया था, किसी की नजर पड़ी तब पता चला और फिर भागे अस्पताल की तरफ.
हमें तो पता भी नहीं चलना है, टीवी देखते हुए, बातों में मशगूल होकर, भोजन को केजुअल मानते हुए ठूंसते हैं, हमें क्या पता चलेगा कि भीतर कौन कौन दुश्मन घुस रहे हैं ? होटलों, पार्टियों, सड़कों के किनारे ठेलों में तो वाकई हमारी मांएं ही बैठी हैं, जो एक एक पत्ते को ध्यान से देखकर आपके लिए भोजन बना रही है !