राखी बंधवाले मेरे मोहन

राखी बंधवाले मेरे मोहन मैं बलिहारी जाऊं
अब तो घर आजा मेरे मोहन मैं बलिहारी जाऊं-

1.मोरमुकुट तेरा लाके रखा है
शीश सजा ले मेरे मोहन मैं बलिहारी जाऊं-

2.पीताम्बर तेरा लाके रखा है
कंठ सजा ले मेरे मोहन मैं बलिहारी जाऊं-

3.मटकी में माखन-मिश्री लाके रखा है
भोग लगा ले मेरे मोहन मैं बलिहारी जाऊं-

4.अंगना में मेला सजाके रखा है
रास रचा ले मेरे मोहन मैं बलिहारी जाऊं-
बंसी सुना दे मेरे मोहन मैं बलिहारी जाऊं-

5.कब से खड़ी मैं तेरी बाट निहारूं
दरश दिखा दे मेरे मोहन मैं बलिहारी जाऊं-
इतनी-सी रखले मेरी बात मैं बलिहारी जाऊं-

(तर्ज़- कर दे दिलों के दुःख दूर मेरे शंकर भोले…)

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।