मुक्तक/दोहा

दोहा-रोला-कुंडली

 दोहा 

*अपने पुरखों ने कही,बड़ी तथ्य की बात ।*
*व्यर्थ खर्च करना नही,व्यर्थ स्वयं से घात ।।*

 रोला

व्यर्थ स्वयं से घात,कष्टमय जीवन होता ।
पाता वह ही धान,खेत में जो है बोता ।।
सुनो ! सुमन उत्कर्ष,अधूरे मन के सपने ।
छोड़े जग सब साथ,त्याग देते सब अपने ।।

 कुण्डली

अपने पुरखों ने कही,बड़ी तथ्य की बात ।
व्यर्थ खर्च करना नही,व्यर्थ स्वयं से घात ।।
व्यर्थ स्वयं से घात,कष्टमय जीवन होता ।
पाता वह ही धान,खेत में जो है बोता ।।
सुनो ! सुमन उत्कर्ष,अधूरे मन के सपने ।
छोड़े जग सब साथ,त्याग देते सब अपने ।।

नवीन श्रोत्रिय “उत्कर्ष”
श्रोत्रिय निवास बयाना

परिचय - नवीन श्रोत्रिय

नवीन श्रोत्रिय "उत्कर्ष" श्रोत्रिय निवास, भगवती कॉलोनी बयाना (भरतपुर)राजस्थान 321401 +91 84 4008-4006​

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