दोहे

घर घर जा माँगे भीख, भीख मिले या मान
मान भरे ना पेट को, भीख पेट की शान।

आधी मटकी हाथ में, आधी करे सवाल
आँधी आफत छोड़ दे, आँधी देत बवाल।

मीठी बोली बोल के, वचन निभाये आज
कैसे मानव हो लिये, सवाल जग में आज।

पंछी उड़े हैं नभ में, नभ सारा आजाद
अज़ादी के ताल पर, लगे हमें है नाद।

पानी पानी कह रहा, पानी मिला न पास
भटका घर घर देहरी, पानी दिया न आस।

परिचय - अशोक बाबू माहौर

जन्म -10 /01 /1985 साहित्य लेखन -हिंदी साहित्य की विभिन्न विधाओं में संलग्न प्रकाशित साहित्य-विभिन्न पत्रिकाओं जैसे -स्वर्गविभा ,अनहदकृति ,सहित्यकुंज ,हिंदीकुंज ,साहित्य शिल्पी ,पुरवाई ,रचनाकार ,पूर्वाभास,वेबदुनिया आदि पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित I साहित्य सम्मान -इ पत्रिका अनहदकृति की ओर से विशेष मान्यता सम्मान २०१४-१५ से अलंकृति I अभिरुचि -साहित्य लेखन ,किताबें पढ़ना संपर्क-ग्राम-कदमन का पुरा, तहसील-अम्बाह ,जिला-मुरैना (म.प्र.)476111 ईमेल- ashokbabu.mahour@gmail.com 9584414669 ,8802706980