मुक्तक/दोहा

दोहे

श्रृद्धा की थाली सजी, मनभावों के दीप।
स्वीकारो प्रभु वंदना, अंतस करो सुदीप।।

रीति नीति सत साधना, मानव सेवा भाव।
जीवन में सब से रहे, सदा उचित बर्ताव।।

धन दौलत वैभव भले, मत देना जगदीश।
इतनी विनती है नही, झुके बदी से शीश।।

सतकर्मीं धारा बहे, जीवन में अविराम।
समय पड़े आऊँ सदा, दीन दुखी के काम।।

अंतस में सदभावना, वाणी में सम्मान।
सबको आदर दूँ सदा, और सभी को मान।।

धर्म कर्म पर ही सदा, बना रहे विश्वास।
कथनी करनी में नही, रहे विरोधाभास।।

ज्ञान दीप उजियार से, रहे नही तम शेष।
जीवन भर पनपे नही, लालच ईर्ष्या द्वेष।।

वैचारिक बदलाव से, बदलेंगे हालात।
कर्तव्यों के साथ हो, अधिकारों की बात।।

बंसल कर्ता भी वही, और वही करतार।
भवसागर से नाव को, वही लगाता पार।।

सतीश बंसल
२१.०८.२०१७

*सतीश बंसल

पिता का नाम : श्री श्री निवास बंसल जन्म स्थान : ग्राम- घिटौरा, जिला - बागपत (उत्तर प्रदेश) वर्तमान निवास : पंडितवाडी, देहरादून फोन : 09368463261 जन्म तिथि : 02-09-1968 : B.A 1990 CCS University Meerut (UP) लेखन : हिन्दी कविता एवं गीत प्रकाशित पुस्तकें : " गुनगुनांने लगीं खामोशियां" "चलो गुनगुनाएँ" , "कवि नही हूँ मैं", "संस्कार के दीप" एवं "रोशनी के लिए" विषय : सभी सामाजिक, राजनैतिक, सामयिक, बेटी बचाव, गौ हत्या, प्रकृति, पारिवारिक रिश्ते , आध्यात्मिक, देश भक्ति, वीर रस एवं प्रेम गीत.