गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

तू मिले ना मिले , गिला नहीं कोई
खबर दे सके मुझे ,मिला नहीं कोई

आयातों ने नवाजा हो जिसे खुद
उससे नूर ए नज्म  हिला नहीं कोई

खुशामदी में कोई हीलाहवाली तो नहीं
बकने के लिए ये, मुँह खुला नहीं कोई

रुख ने रुखसार तेरे कैसे गुदगुदाए होंगे
हाल ए बयां बताने को , रुका नहीं कोई

मुद्दत हो गए झलक की दीदारी को हमे
तरसीफ लाये मेहमाँ यहां दिखा नहीं कोई

मगरूर हो गयी है अजनबी में तू इतनी
कि दस्तको में भी वक्त मिला नहीं कोई

बेकरारी है दिलोजॉ से पर ये प्रखर तुझसे
चाहत बरकरार हो दिल मिला नहीं कोई

संदीप चतुर्वेदी “संघर्ष”

संदीप चतुर्वेदी "संघर्ष"

s/o श्री हरकिशोर चतुर्वेदी निवास -- मूसानगर अतर्रा - बांदा ( उत्तर प्रदेश ) कार्य -- एक प्राइवेट स्कूल संचालक ( s s कान्वेंट स्कूल ) विशेष -- आकाशवाणी छतरपुर में काव्य पाठ मो. 75665 01631