गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

छंद- रोला, मात्रा भार- 11, 13 (विषम चरण तुकांत 1 2, सम चरण का अंत 1 2, समांत- अना, अपदांत….. “गीतिका” खुले गगन आकाश, परिंदों सा तुम उड़ना जब तक मिले प्रकाश, हौसला आगे बढ़ना भूल न जाना तात, रात भी होती पथ पर तक लेना औकात, तभी तुम ऊपर चढ़ना।। सहज सुगम अंजान, विकल […]

गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल

“गज़ल” देखता हूँ मैं कभी जब तुझे इस रूप में सोचता हूँ क्यों नहीं तुम तके उस कूप में क्या जरूरी था जो कर गए रिश्ते कतल रखके अपने आप को देखते इस सूप में।। देख लो उड़ गिरे जो खोखले थे अधपके छक के पानी पी पके फल लगे बस धूप में।। छोड़ के […]

सामाजिक

पाखंड को जेल

“पाखंड केो जेेल” शायद ही किसी धर्म की सीमा पाखंडियों के चंगुल से सुरक्षित बची हो। खूब आक्रमण हो रहा है अपने ही विश्वास को खंडित करने के लिए, और धर्म के पहरेदार/ अनुयायी, अपना सब कुछ उस पाखंडी को अर्पण करने के लिए खुद को जैसे चाहो लूट लो का करारनामा लिए हुए, श्रद्धा, […]

कविता

यशोदा छंद

विधान~ [ जगण गुरु गुरु ] (121 2 2) 5 वर्ण,4 चरण, दो-दो चरण समतुकांत…….ॐ जय माँ शारदे……! “यशोदा छंद” पढ़ी पढ़ाई भली भलाई। कहा न मानो करो त जानो।।-1 लगी लगाई हल्दी सुहाई। छटा निराली खुशी मिताली।।-2 नई नवेली वहू अकेली। सुई चुभाए दिल घबराए।।-३ उगी हवेली नई चमेली। अनार छाए सितार गाए।।-4 पकी […]

मुक्तक/दोहा

दोहा मुक्तक

“दोहा मुक्तक” अमिय सुधा पीयूष शिव, अमृत भगवत नाम सोम ब्योम साकार चित, भोले भाव प्रणाम मीठी वाणी मन खुशी, पेय गेय रसपान विष रस मुर्छित छावनी, सबसे रिश्ता राम।।-1 अमृत महिमा जान के, विष क्योकर मन घोल गरल मधुर होता नहीं, सहज नहीं कटु बोल तामस पावक खर मिले, लोहा लिपटे राख उपजाएँ घर […]

कविता पद्य साहित्य

दुःख ही औरत का मित्र

औरत की किस्मत में कितने गम है पुरुष कहते यह तो बहुत कम है| औरत की आँखे होती हमेशा नम पुरुषों को नहीं होता इस पर कोई गम| कहते है यह तो त्रिया चरित्र है दुःख ही औरत का सच्चा मित्र है| दुःख को सहती जाती रह अडिग घर सुखमय रहे करती रहती गणित। डिगा […]

कविता

दर्द की दास्तां

शांत, व्यवस्थित, योजनाबद्ध शहर । लिए आगोश में, प्राकृतिक नजारे। कल तक था मैं… इक स्मार्ट शहर ॥ आज … नफ़रत की आग में झुलसा, रोता-बिखलता, तहस-नहस, सीने पे लिए खून के छींटे, इंसाफ की चाह में, पहचानो मुझे … कौन सा शहर हूँ मैं? अंजु गुप्ता

कविता

बाल कविता

प्यारी – प्यारी मेरी माँ ••••••••••••••••••••• प्यारी – प्यारी मेरी माँ रोज भोर को मुझे जगाती फिर नहलाती – खाना खिलाती पकड़के उंगली स्कूल ले जाती || प्यारी – प्यारी मेरी माँ रोज नियम से गार्डन घुमाती टूटे – फूटे रस्तों पे गिरने से बचाती रोज रात को कहानी सुनाती || प्यारी – प्यारी मेरी […]

कविता

परिवर्तन की नाद

सुनो दस्तक … चाहे परिवर्तन अब नारी । बीता वो युग, जब थी नारी “केवल श्रद्धा । जो बन कठपुतली … सिले होठों से सुनती थी मात्र आदेश । कभी बिष पीने का … तो कभी विस्थापित होने का, कभी पाषाण बनने का तो कभी सती होने का । अब खोल किवाड़ ज्ञान – चक्षु […]

लघुकथा

स्वच्छ भारत 

सभा को संबोधित करते हुए नेताजी ने कहा – हमें न्यू इंडिया बनना। स्वच्छ भारत निर्माण हमारा ध्येय है। किसी भी प्रकार की गंदगी हम नहीं फैलने देंगे। कूडा-करकट का नामोनिशान नहीं रहने देंगे। भारत को सुंदर बनाने के लिए हम जान तक दे देंगे। नेताजी की बात सुनकर मंत्रमुग्ध हुई जनता ने तालियों का […]