Monthly Archives: August 2017

  • वतन

    वतन

    उस वक़्त का इन्तजार है जब वतन में खुशहाली होगी, पतझर हो या सावन, हर मौसम हरियाली होगी, न दिन में तपन होगी,न रात काली होगी, हर दिन होली हर रात दिवाली होगी। हर दिल में...

  • गौ सृष्टि का आरम्भ है

    गौ सृष्टि का आरम्भ है

    गौ सृष्टि का आरम्भ है •••••••••••••••••••••• गौ सृष्टि का आरम्भ है शुभारंभ है | गौ मानवता की पौशक है दानवता को हानिकारक है || हिंदू-मुस्लिम, सिख-ईसाई भेद न करती अपना अमृतमयी दुग्ध पिलाती | अन्त समय...




  • बाल कविता

    बाल कविता

    गरम समोसा गरम जलेबी _________ पापा – पापा मोटूराम हलवाई की दुकान पर हमको ले जाओ गरम समोसा गरम जलेबी हमें खिलाओ || पापा – पापा देखो – देखो गोल – मटोल कितने सुघड़ समोसा लच्छेदार...

  • भूख

    भूख

    अंतरियाँ बच्चों की जब  कुलबुला उठती है रात्रि पहर  माँ दौड़ती है  सहेज कर रखे खाली  ढक्कन टूटे डब्बे की तरफ  जबकि वो जानती है  कुछ भी शेष नहीं है उसमें  कुछ बचे रह जाने के...

  • बचपन

    बचपन

    बचपन आज गली के मोड़ पर ठहरी गाड़ी में कुछ बच्चों को देखा, या यूँ कहूँ मैंने एक ठिठुरा – कैद बचपन देखा।। हाथों में न कंचे थे न थे गुल्ली डंडे वे मुझको जान पड़े...

  • गीत

    गीत

      समझौते हैं, रिश्तों में अब कहाँ मिठास रही ? सिर्फ औपचारिकता है,अपनापन नही रहा । रिश्तों का जो बंधन है ,मनभावन नही रहा । पावन प्रेम की सुघर कल्पना बड़ी उदास रही । समझौतें हैं...

  • बाबा ……. रे बाबा

    बाबा ……. रे बाबा

    निर्भया जैसी बच्चियों के लिए संवेदना प्रकट करने वाले हमारे समाज के हितकारी लोगो को अचानक ऐसा क्या दिखाई दे जाता है कि राम और रहीम के नाम को कलंकित करने वाले एक पुरुष को महापुरुष...