Monthly Archives: August 2017

  • तरही ग़ज़ल

    तरही ग़ज़ल

    प्यार का अजब सिला मिला हमको। होकर फिर वो जुदा मिला हमको। जिसकी आँखों में थी कभी ज़िन्दादिली; वो जब मिला खफा मिला हमको। वक्त ने बदल दिया फिर कितना उसे; अपने ही शहर में गुमशुदा...



  • “गीतिका”

    “गीतिका”

    देशज गीतिका, मात्रा-भार-22, समांत- आर, पदांत- हो गइल……. जे पतुरिया के अँचरा उघार हो गइल माथ ओकरा अंहरिया सवार हो गइल दुईज़ चंदा नियन उग जे बिहरत रहे उ अमावस के जइसन भेंकार हो गइल॥ मन...

  • डीजे विथ चिलम और बोलो बम बम बम

    डीजे विथ चिलम और बोलो बम बम बम

    सावन, बाबा भोले नाथ का महीना, बारिश का महीना, प्रेम का महीना. हर कोई बेसब्री से इंतजार करता है, रामकृपाल बाबू धान का बीया गिरवा दिए है, पिछले तीन महीने से बाबाधाम देवघर जाने का इंतजार...

  • पहचान

    पहचान

    महफिल में तन्हाई क्यूँ डराती मुझे परछाई क्यूँ अपनों के बीच अजनबी सी हूँ मुझे खुद की एक पहचान चाहिये । जीवन से अंधियारा मिटा दे, लकीरे किस्मत की चमका दे, भविष्य को जो रौशन कर...