कविता

रावण

फिर से आज दशहरा आया, मेरा पुतला बना दिया l रामवेश लेकर मानव ने मरे हुए को जला दिया l साधुवेश में मेरे द्वारा सीता एक बार थी ठगी गई l पाखण्डी-चंगुल में फंसती नारी फिर भी जगी नहीं l मैंने तो बस हरण किया था, उसे तनिक भी छुआ नहीं l मुझसे बड़े अधर्मी […]

सामाजिक

बेटियों के बहाने

बड़ा सम्बेदंशील शब्द है और कुटिल बुद्धिकारो के लिए अल्पसंख्यक, दलित की तरह इस्तेमाल करने में बहुत मुफीद! अल्पसंख्यक, दलित की तरह अब इनको भी इस्तेमाल करनेवालों की होड़ लगी है. क्योकि इनका भारत में सामाजिक स्वरुप ही कुछ ऐसा है. गांवो में एक किस्सा आम है. एक महिला सड़क किनारे घास काट रही थी, […]

गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

चले गए- ग़ज़ल

इक पल को मुस्कुराये रुलाकर चले गए आये  ज़रा  सी  देर  को  आकर चले गए मुद्दत  से  बादलों  का  हमे  इंतज़ार  था बरसे मगर वो प्यास  बढाकर  चले  गए इस दर्जा तल्ख़ियों की वजह उनसे पूछली सारी  कमी  हमारी  गिनाकर  चले  गए शायद किसी मक़ाम की जल्दी में थे ‘अज़ीज़’ रस्ते  जो  वापसी  के  मिटाकर  […]

राजनीति

राजनिति को सुधरना होगा

1947 से आज तक भारत को अपनों ने लूटा है, इससे पहले तमाम विदेशिओं ने लूटा | हालांकि हमारा भारत लुटता रहा, पिटता रहा पर हमारी पहचान अमिट रही | परन्तु अब जब अपने ही लूट – लूट कर विदेशी खाते भर रहे हैं तो भारत की पहचान पर संकट के बादल मडराने लगे हैं […]

राजनीति सामाजिक

वामपंथ : अब रावण और महिषासुर का सहारा

रावण की पूजा कहीं-कहीं होने के समाचार नये नहीं हैं और न ही महिषासुर को माननेवालों का अंत हुआ है। नगण्य ही सही लेकिन इनसे जुड़ाव रखनेवाले लोग हमारे देश में हैं। जैसे मध्यप्रदेश, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और उत्तरप्रदेश में कुछेक स्थानों पर रावण को पूजने की परंपरा है। इन आराधना वाले स्थानों की […]

राजनीति

विश्वविद्यालयों को अशांत करने की राजनीति

देश के विश्वविद्यालय एक बार फिर अशांत हो रहे हैं। यह अशांत हो रहे हैं या फिर किये जा रहे हैं यह तो जांच का विषय है लेकिन हालात लापरवाही के कारण वाकई चिंताजनक हो गये हैं जिसका लाभ सत्ता समर्थक विद्यार्थी परिषद तो कतई नहीं उठा पा रही है अपितु उसे विश्वविद्यालयें में घटने […]

गीत/नवगीत

उजियार होगा या नहीं

रवि किरण ने कर लिया रिस्ता तिमिर से, कौन जाने भोर को उजियार होगा या नहीं। हर तरफ छाई निराशा, आस की बस लाश बाकी। साँझ तो सिसकी अभी तक, भोर में फैली उदासी। तम सघन में चल पड़ी जब, तम-किरण की पालकी, अब दीप अपने वंश का अवतार होगा या नहीं। अब मुस्कराहट फूल […]

बाल कहानी बाल साहित्य

*फूल नहीं तोड़ेंगे हम*

  14 नवम्बर, बाल दिवस, बच्चों के प्यारे चाचा नेहरू का जन्म-दिवस, देवम के स्कूल में बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है। सभी छात्र बड़े उत्साह और उमंग के साथ इस दिवस को मनाते हैं। स्कूल में इस दिन बच्चों के लिये भिन्न-भिन्न प्रकार की  प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है। शिक्षक-गण एवं विद्यार्थियों […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

तुम्हारी याद में प्रियतम ,नींद भी टूट जाती है । न मुझको चैन आता है,न कोई बात भाती है । तुम्हारी याद के मोती रोज आँखो से झरते हैं, नींद को ,भीड़ ख्वाबों की, हमेशा तोड़ जाती है । तुम्हारे बिन फुहारें,गीत,कजरी राग सावन के – मुझे हर रोज यह काली घटा भी मुँह चिढ़ाती […]

इतिहास

भारतीय राजनीति के पुरोधा- राष्ट्रपिता महात्मा गांधी

भारतीय राजनीति के पुरोधा महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 में गुजरात के पोरबंदर मे दीवान करम चंद गांधी के यहां हुआ था।इनके माता का नाम पुतली बाई था। इनकी शादी बाल्य काल में ही 1883 में कस्तुरबा गांधी से हुई।प्रारंभिक शिक्षा गुजरात में ही हुई परन्तु वकालत करने के लिए 1888 में लंदन […]