Monthly Archives: September 2017

  • रावण

    रावण

    फिर से आज दशहरा आया, मेरा पुतला बना दिया l रामवेश लेकर मानव ने मरे हुए को जला दिया l साधुवेश में मेरे द्वारा सीता एक बार थी ठगी गई l पाखण्डी-चंगुल में फंसती नारी फिर...

  • बेटियों के बहाने

    बेटियों के बहाने

    बड़ा सम्बेदंशील शब्द है और कुटिल बुद्धिकारो के लिए अल्पसंख्यक, दलित की तरह इस्तेमाल करने में बहुत मुफीद! अल्पसंख्यक, दलित की तरह अब इनको भी इस्तेमाल करनेवालों की होड़ लगी है. क्योकि इनका भारत में सामाजिक...

  • चले गए- ग़ज़ल

    चले गए- ग़ज़ल

    इक पल को मुस्कुराये रुलाकर चले गए आये  ज़रा  सी  देर  को  आकर चले गए मुद्दत  से  बादलों  का  हमे  इंतज़ार  था बरसे मगर वो प्यास  बढाकर  चले  गए इस दर्जा तल्ख़ियों की वजह उनसे पूछली...




  • उजियार होगा या नहीं

    उजियार होगा या नहीं

    रवि किरण ने कर लिया रिस्ता तिमिर से, कौन जाने भोर को उजियार होगा या नहीं। हर तरफ छाई निराशा, आस की बस लाश बाकी। साँझ तो सिसकी अभी तक, भोर में फैली उदासी। तम सघन...

  • *फूल नहीं तोड़ेंगे हम*

    *फूल नहीं तोड़ेंगे हम*

      14 नवम्बर, बाल दिवस, बच्चों के प्यारे चाचा नेहरू का जन्म-दिवस, देवम के स्कूल में बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है। सभी छात्र बड़े उत्साह और उमंग के साथ इस दिवस को मनाते हैं।...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    तुम्हारी याद में प्रियतम ,नींद भी टूट जाती है । न मुझको चैन आता है,न कोई बात भाती है । तुम्हारी याद के मोती रोज आँखो से झरते हैं, नींद को ,भीड़ ख्वाबों की, हमेशा तोड़...