शिशुगीत

शिशुगीत

1.  मुखौटे

बंदर, भालू और सियार
पुलिस, सिपाही, चौकीदार
जो चाहें बन जाएँ आप
पहन मुखौटे तो लें यार

 

2. चश्मा

मेले में से चश्मा लाया
आँखों पर जब आज चढ़ाया
वाह-वाह सबने ही बोला
लाल फ्रेम मुखड़े पर भाया

 

3. सैनिक

सैनिक सबकी रक्षा करते
नहीं किसी से हैं वे डरते
देश हमारा उनके दम पर
नमन उन्हें हम सब हैं करते

 

4.  पुलिस

सायरन जब-जब पुलिस बजाती
चोरों की टोली घबराती
इधर-उधर वे भागे फिरते
पकड़ उन्हें लेकिन ले जाती

 

5.  चौकीदार

दरवाजे पर चौकीदार
पल-पल रहता वो तैयार
घुसे न कोई ऐरा-गैरा
बस मालिक का हो अधिकार

*कुमार गौरव अजीतेन्दु

शिक्षा - स्नातक, कार्यक्षेत्र - स्वतंत्र लेखन, साहित्य लिखने-पढने में रुचि, एक एकल हाइकु संकलन "मुक्त उड़ान", चार संयुक्त कविता संकलन "पावनी, त्रिसुगंधि, काव्यशाला व काव्यसुगंध" तथा एक संयुक्त लघुकथा संकलन "सृजन सागर" प्रकाशित, इसके अलावा नियमित रूप से विभिन्न प्रिंट और अंतरजाल पत्र-पत्रिकाओंपर रचनाओं का प्रकाशन