कुसूर !

सरला आज बहुत खुश थी उसके इकलौते बेटे अमीत और मीनू की शादी थी, शादी सम्पन्न हो गई थी। मीनू और अमीत वापिस जा चुके थे, अमीत प्राईवेट कंपनी में नौकरी करता था इसलिए इतने दिन ही रुक सकता था। मां से विदा लेकर दोनो निकल चुके थे, पर कुछ ही दिनो में अमीत को पता चल गया कि उसके साथ धौखा हुआ है मीनू किसी और से प्यार करती थी, घरवालों को वो पसंद नहीं था उन्हें लगा शादी के बाद मीनू उसे भूल जाएगी पर ऐसा नहीं हुआ मीनू शादी के बाद भी मायके आने के बहाने उसे मिलती रही। अब घरवाले भी जान गए थे कि मीनू अमीत को धौखा दे रही है, अमीत कब तक चुप रहता अब तो मीनू ने भी कह दिया था उसे तलाक चाहिए। अमीत और उसकी मां ने आगे ही बड़ा दुख देखा था, उसके पापा एक दिन अचानक ही कहीं चले गए थे क्या हुआ था कोई नहीं जानता था। अब एक और दुख ! अमीत को लगा अब और दुख वो सहन नहीं कर पाएंगी अमीत छुप कर रोता था कि मां को सच जानकर बहुत दुख होगा पर कब तक छुप सकता था सच! मां बहुत दुखी थी उसने अपनी ज़िन्दगी तो काट ली थी पर बेटे की हालत वो नहीं देख पा रही थी। बरसो की तपस्या का कोई फा.यदा नहीं हुआ था। सारी ज़िन्दगी बेटे की खुशी की आस में बिता दी पर ..मीनू के ममी पापा भी दुखी हो रहे थे उन्होने अपनी बेटी को बहुत समझाया, पर वो नहीं मानी और तलाक हो गया। अमीत सोच रहा था उसे जाने किस कुसूर की सजा मिली थी, मां को लगा अभी पति का दुख नहीं भूला अमीत की खुशी में खुशी ढूंढने लगी थी। मीनू के ममी पापा को शर्म आ रही थी कि उनको ही मीनू की शादी उसकी मर्जी से कर देनी चाहिए थी, किसी का घर तो खराब नहीं होता! मीनू को भी महसूस हुआ कि उसने गल्त किया पर वो अपनी खुशी के अलावा कुछ सोचना नहीं चाहती थी।
— कामनी गुप्ता, जम्मू

परिचय - कामनी गुप्ता

माता जी का नाम - स्व.रानी गुप्ता पिता जी का नाम - श्री सुभाष चन्द्र गुप्ता जन्म स्थान - जम्मू पढ़ाई - M.sc. in mathematics अभी तक भाषा सहोदरी सोपान -2 का साँझा संग्रह से लेखन की शुरूआत की है |अभी और अच्छा कर पाऊँ इसके लिए प्रयासरत रहूंगी |