मुक्तक/दोहा

“दोहा मुक्तक”

भूषण आभूषण खिले, खिल रहे अलंकार। गहना इज्जत आबरू, विभूषित संस्कार। यदा कदा दिखती प्रभा, मर्यादा सम्मान- हरी घास उगती धरा, पुष्पित हरशृंगार॥-1 गहना हैं जी बेटियाँ, आभूषण परिवार। कुलभूषण के हाथ में, राखी का त्यौहार। बँधी हुई ये डोर है, कच्चे धागे प्रीत- नवदुर्गा की आरती, पुण्य प्रताप दुलार॥-2 महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

राजनीति

आज की स्थिति तो राम राज्य लायक नहीं हो सकती!

दशहरा असत्य पर सत्य की विजय। दुष्ट पर सज्जन की विजय का पर्व। सामाजिक दृष्टि से किसान जब फ़सल को काटकर घर लाते हैं, तो उसे भगवान की देन मानकर उनकी पूजा आराधना करते हैं। यह दशहरे का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व है। आज के सामाजिक और राजनीतिक परिवेश को देखकर बहुतेरे सवालात जन्म लेते […]

राजनीति

दद्दा ज़ी

हमारे गांव के बगल में एक दद्दा जी है जो स्वभाव से अक्खड़ और घोर राष्ट्रवादी. ८७ साल उम्र होने के बावजूद चेहरे पर वही चमक और सिंह के दहाड़ जैसी आवाज. दिन भर गाय भैंस चराना और आल्हा, राणा प्रताप और क्रांतिकारियों के बहादुरी तथा त्याग के गीत गाना उनकी दिनचर्या है. साफगोई तो […]

कविता

कविता

परिंदा आकाश में चाहे जितना ऊंचा उड़ ले दाना चुगने उसे जमीन पर आना ही पड़ता है आसमान में उड़कर तो तारे हाथ नहीं आते मोती पाने के लिए गहरे समुद्र में जाना ही पड़ता है चाँद चैदहवीं का अपने रूप पर जितना भी इतरा ले अमावस में उसे अपना मुँह छिपाना ही पड़ता है […]

समाचार

सामाजिक संस्थाओं ने डॉ सुलक्षणा को किया सम्मानित

नरेंद्र मोदी विचार मंच की महिला शाखा की प्रदेश अध्यक्ष, शिक्षाविद, कवयित्री एवं समाज सेविका डॉ सुलक्षणा अहलावत को दो सामाजिक संस्थाओं वक्त दें – रक्त दें रक्तदान सेवा सोसायटी और जीवनदायिनी सोशल फाउंडेशन द्वारा सम्मानित किया गया। यह दोनों सम्मान उन्हें सोशल मीडिया में एक मुहिम चलाकर लगभग दो साल की कैंसर पीड़ित बच्ची […]

समाचार

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ को सार्थक कर रही हैं डॉ सुलक्षणा

माननीय प्रधानमंत्री द्वारा दिये गए नारे बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ को नरेंद्र मोदी विचार मंच की महिला शाखा की प्रदेश अध्यक्ष, शिक्षाविद, कवयित्री एवं समाज सेविका डॉ सुलक्षणा अहलावत पूर्णरूप से सार्थक कर रही हैं। जहाँ एक ओर वो अपनी सशक्त लेखनी से बेटियों के उत्थान, उन्हें जागरूक करने के लिए प्रयासरत हैं वहीं दूसरी […]

मुक्तक/दोहा

मुक्तक – हौसला

रेत की दीवार पर महल बना सकता हूँ, बहते पानी पर लिख कर बता सकता हूँ। मेरे हौसलों का अहसास नही है तुमको, बिना पंख के भी उडकर दिखा सकता हूँ। — अ कीर्तिवर्धन

कविता

कविता — हदें

हदें निर्धारित हैं नदी की, नहर की, तालाब व समंदर की, और स्त्री-पुरुष की भी। मगर जब टूटती हैं हदें बरसात में नदी-नहर पोखर या समंदर की आती है प्रलय और कर जाती है सर्वस्व विनाश। और बरसात के बाद लौट जाते है वापस अपनी हदों के बीच नदी, नहर, पोखर  समंदर। मगर टूटती हैं […]

कविता

कविता – अरमानों की भट्टी

अरमानों की भट्टी हर पल, हरएक के दिल में जलती है। चाहे सब कुछ मिल जाता है; फिर भी कुछ बाते खलती है… ख्वाहिश पूरी कभी न होती, गिरते रहते व्यर्थ ही मोती: चले गए अगणित मतवाले……. मन संतोषी सदा सुखी है, सुखी झोपडी  वाले रहते… कल की चिंता आज भी करते, उस चिंता से […]