Monthly Archives: September 2017


  • रावण

    रावण

    काम वो शैतान ऐसा कर गया। नाम फिर बदनाम सारा कर गया।। राम का धर वेश रावण आ गया। काम वो हैवानियत का कर गया।। क्या किया इंसानियत के नाम पर। जुर्म का व्यापार कैसा कर...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    (शीर्षक— अचल, अटल, अडिग, अविचल, स्थिर, दृढ़ आदि समानार्थक शब्द (मापनी- 1222, 1222, 1222, 1222 अटल मेरा विश्वास हुआ तुम्हें निरखकर रे साथी अविचल अडिग कभी न हुआ तुम्हें लिपटकर रे साथी यही है जीत अफसाना...

  • कुंडलिया

    कुंडलिया

    “कुंडलिया” जाओ तुझको दे दिया, खुला गगन अहसास वंधन रिश्तों का भला, पंख काहिं वनवास पंख काहिं वनवास, भला क्यों तुझको बाँधूँ ऊसर परती खेत, अकारण बैला नाँधूँ कह ‘गौतम’ कविराय, परिंदे तुम हर्षाओ वंधन किसे...


  • कविताएँ

    विषय अफवाह ——– कल मेरी मौत की उड़ी अफवाह ! सारे अखबारों ने सम्पादकीय छापे । सारे चैनल दनदनाते रहे चौबीस घण्टे ! बहस , वार्ताओं के दौरों में बड़े बड़े — दिग्गज़ मेरी मौत पर...