सामाजिक

लेख– व्यवस्था की टूटी चारपाई, मीडिया और बाबा

    आज की नजाकत में धर्म पर हावी विज्ञान है। फ़िर भी धर्मांधता का चश्मा समाज पर चढ़ा है। सत्ता का तख़्त सजाती जनमानस है। जनमानस और सियासी रणबाकुरों की फ़ौज लिपटी एक बाबा के चरणों में है। आज देश में न्यू इंडिया का तासा पीटा जा रहा है, क्या न्यू इंडिया में जनमानस […]

गीतिका/ग़ज़ल

रावण

काम वो शैतान ऐसा कर गया। नाम फिर बदनाम सारा कर गया।। राम का धर वेश रावण आ गया। काम वो हैवानियत का कर गया।। क्या किया इंसानियत के नाम पर। जुर्म का व्यापार कैसा कर गया।। कब तलक नारी सहेगी जुल्म ये। पाप काली को बुलावा कर गया।। छल कपट करता रहा पापी सदा। […]

मुक्तक/दोहा

मुक्तक

(शीर्षक— अचल, अटल, अडिग, अविचल, स्थिर, दृढ़ आदि समानार्थक शब्द (मापनी- 1222, 1222, 1222, 1222 अटल मेरा विश्वास हुआ तुम्हें निरखकर रे साथी अविचल अडिग कभी न हुआ तुम्हें लिपटकर रे साथी यही है जीत अफसाना लिए चलते नयन तके नजारों को स्थिर अचल चाल यह मेरी तुम्हें समझकर रे साथी।। महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

कविता

कुंडलिया

“कुंडलिया” जाओ तुझको दे दिया, खुला गगन अहसास वंधन रिश्तों का भला, पंख काहिं वनवास पंख काहिं वनवास, भला क्यों तुझको बाँधूँ ऊसर परती खेत, अकारण बैला नाँधूँ कह ‘गौतम’ कविराय, परिंदे तुम हर्षाओ वंधन किसे सुहाय, उड़ो मगन जियो जाओ।। महातम मिश्र गौतम गोरखपुरी

कविता

गरीब की जिंदगी

सचमुच गरीब की जिंदगी एक पान के बीडे की तरह सर्वत्र सुलभ है उसे जब चाहो तब खरीद लो और जब चाहो तब थूक दो पर हम यह भूल जाते है कि हमारा मुख उस की बदौलत ही लाल हैं।  

कविता

कविताएँ

विषय अफवाह ——– कल मेरी मौत की उड़ी अफवाह ! सारे अखबारों ने सम्पादकीय छापे । सारे चैनल दनदनाते रहे चौबीस घण्टे ! बहस , वार्ताओं के दौरों में बड़े बड़े — दिग्गज़ मेरी मौत पर चिल्लाते रहे ! सत्ता के माथे पर चमकी कुछ बूंदे ! विपक्ष मामला लपक लेने को बेचैन ! आख़िर […]

गीतिका/ग़ज़ल

हो न जाये कही बदनाम मिरे साथ न चल।

हो न जाये कही बदनाम मिरे साथ न चल। साथ उछले नहीं ये नाम मिरे साथ न चल। चाहते हम नहीं की यार लगे तुझ पर अब फिर कोई इक नया इलज़ाम मिरे साथ न चल। दौर माना कि बुरा है ये, समझ हमको बस लाख सहते हुये इलज़ाम मिरे साथ न चल। घात आपने […]

सामाजिक

जीवन दर्पण नारी (बेखबर फासलें)

       कुछ ही दिन बीते थे,  सिमी को अपने मायके आये,  लेकिन उसे इस बार का मायका आना, इक अरसा लगा बिता रही हो, सिमी खिड़की से बाहर लोगों की चहलपहल और परिंदों को देखे जा रही थीं।  घड़ी की सूइयों ने एकदम से चलना रोक लिया हो, पति के एक्सीडेंट से गुजर जाने […]

कविता

कविता : बता तेरे लिए क्या लिख दूँ..!!

बता तेरे लिए क्या लिख दूँ..? बारिश की गिरती फुहार लिख दूँ, ज़िन्दगी में ना आयी जो बहार लिख दूँ, जो ना हुयी वो सहर लिख दूँ, जो बेरुखीे तुमने की वो ज़हर लिख दूँ, लफ्ज़ अब तक अधूरे है जिनके वो बिना लफ़्ज़ों की आधी कहानी लिख दूँ, अन्तःमन में बहती बेपनाह दर्द की […]

कविता

सताती हैं हमें हर दम,…तुम्हारे प्यार की बातें।

सताती हैं हमें हर दम,…तुम्हारे प्यार की बातें। कभी इक़रार की बातें, कभी इनकार की बातें। किए क्या ख़ूब तुमने इश्क़ में वादे हजारों भी। रही बस याद हमको आपके इज़हार की बातें। …..✒राज सिंह