Monthly Archives: October 2017




  • “गीतिका”

    “गीतिका”

    छंद – “विष्णु पद ” (सम मात्रिक )मापनी मुक्त, शिल्प विधान – चौपाई +10 मात्रा ।, 16,10 = 26 मात्रा ।, अंत में गुरु गुरु अनिवार्य खुलकर नाचो गाओ सइयाँ, मिली खुशाली है अपने मन की...



  • ग़ज़ल : मेरी रूह

    ग़ज़ल : मेरी रूह

    तेरा मिलना कितना सुहाना लगता है मुझसे रिश्ता सदियों पुराना लगता है… देखा जब से तेरे आँखों में सनम दिल इश्क़ में दीवाना लगता है…  फ़िज़ा में फूल बिखरे चाहत के मौसम-ए-बहार मस्ताना लगता है.. दरम्यां...

  • दीपक का अहंकार

    दीपक का अहंकार

    अकड़ दीप की देख के मैंने, प्रश्न एक जब उससे पूछा- “किस कारण तू झूम रहा है, किए हुए सिर अपना ऊँचा?” मस्त पावन के झोंकों के संग, उसने अपना अंतस खोला कुछ मुसकाया, कुछ इठलाया,...