Monthly Archives: October 2017



  • “गज़ल/गीतिका”

    “गज़ल/गीतिका”

    रोज मनाते बैठ दिवाली बचपन लाड़ दुलार सखी नन्हें हाथों रंग की प्याली दीया जले कतार सखी नीले पीले लाल बसंती हर फूल खिले अपनी डाली संग खेलना संग खुशाली नाहीं कोई दरार सखी॥   चौक...

  • “जगिया की वापसी”

    “जगिया की वापसी”

    वर्षों से किसी की जुबान पर जिसका नाम भी नहीं आया। भूल गई थी उसके यादों की सारी तस्वीर जो कभी बचपन में संग खेला करती थी। ठिगना कद, घुघराले बाल, छोटी -छोटी आँखे, पर नजर...

  • “विधा- दोहा”

    “विधा- दोहा”

    रे रंगोली मोहिनी, कैसे करूँ बखान विन वाणी की है विधा, मानों तुझमे जान।।-1 भाई दूजी पर्व है, झाँक रहा है चाँद नभ तारे खुशहाल हैं, अपने अपने माँद।।-2 झूम रही है बालियाँ, झलक उठे खलिहान...

  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    नाचत गावत ग्वाल मुरारी माधव मोहन। गोवर्धन गिरि लपकि उचारी माधव मोहन। जय जय केशव गोविंद प्रभु महिमा गिरधारी- राधापति गोपाल कछारी माधव मोहन।।-1 नाम सहस्त्र रूप अलबेला माधव मोहन। मोहक मोहन अति प्रिय छैला माधव...

  • “गीतिका”

    “गीतिका”

    जगमग अवली दीप हमारे सुंदर साख प्रदीप हमारे अनुपम पुंज प्रकाश पर्व यह रोशन चित नवदीप हमारे।। चाँद छुपा है रात दिवाली आभा अति प्रियदीप हमारे।। शोर शराबा किलक पटाखे हरषित प्रिय कुलदीप हमारे।। रंगोली घर...


  • यादें….

    यादें….

    कुछ यादें पुकारती है बहुत दूर से कभी बचपन से..… कभी जवानी से…. बनती है आँखों में धुंधली धुंधली सी तस्वीर कोई बुदबुदाती है कानों में यादों की मीठी पुकार बहुत दूर निकल जाती हूँ यादों...

  • shayari

    shayari

    सुबहा जब तेरा नाम लिया तो खुदा रुठ गया ऐसा लगा आईने की चोट से पत्थर टुट गया प्यार मुझसे तुझे है मुझको उस खुदा से है मैं तुम दोनों के लिए दो हिस्सों में बट...