कविता

संदेश

मेरा संदेश सुनो
जरा कान खोलो
चुप क्यूँ हो बैठे?
अब कुछ तो बोलो

लुटता संसार दिखे
वहशी घुमे रात को
मशाल उठा ली है
देदो अब साथ तो
किसी अपराधी को
धर्म से ना तोलो
मेरा संदेश सुनो
जरा कान खोलो
चुप क्यूँ हो बैठे?
अब कुछ तो बोलो

 

प्रवीण माटी

नाम -प्रवीण माटी गाँव- नौरंगाबाद डाकघर-बामला,भिवानी 127021 हरियाणा मकान नं-100 9873845733