कविता : एहसास तुम्हारा

कल तक मोहब्बत का एहसास ना था
तुमसे मिलके जाना की क्या होती है मोहब्बत
रोज जीते थे हम मगर कुछ यादे थी कड़वी सी
लगता था मुझे कि मेरा वजूद कुछ नही
तुमने आकर मेरी ज़िंदगी मे
मुझे ज़िन्दगी जीना सीखा दिया
आंखों को बंद करके देखती हूँ
हर रोज मैं एक नया ख्वाब
बस तुम दूर ना जाना कभी
जानती हूं कि मीलो की दूरी है
मगर दिल से नज़दीकियों कभी
खत्म होगी नही
कैसे भूल जाऊँगी मैं
वो प्यार तुम्हारा
और मेरी परवाह करने का हक
आज तक मिला नहीं तुमसा
जो इतनी परवाह करता
सब मतलबी से लगे
मैं शुक्रगुजार हूं उस खुदा की
मेरी ज़िंदगी मे तुम्हारी मौजूदगी यूँ
ही चाहिये।।

— उपासना पाण्डेय (आकांक्षा)

परिचय - उपासना पाण्डेय

पूरा नाम- आकांक्षा पाण्डेय उपनाम- उपासना जन्मस्थान-आजाद नगर हरदोई (उत्तर प्रदेश) लौकिक शिक्षा-स्नातक(बी.एस.सी. ) लेखन-2017 जून से अभी तक. वर्तमान लेखन- दैनिक और साप्ताहिक अखबारों में कविताये,शब्दनगरी ,प्रतिलिपी वेबसाइट पर,मासिक पत्रिका,चहकते पंछी ब्लॉग पर कविताये।