बाल नाटक : परमाणु बिजली घर

कैलाश ने मां की स्मृति में बालिका स्कूल में स्टेशनरी वितरित कर दी। संचालक मेडम ने जब छात्राओं को कैलाश का परिचय ‘‘परमाणु वैज्ञानिक‘‘ दिया तब कई छात्राऐं अपनी शंकाओं का समाधान पूछने लग गई।

मीनाक्षी : सर, आजकल प्रतिदिन चार छ: घंटे पावर कट रहता है, इसका क्या कारण है?

कैलाश : मीनाक्षी, हमारे देश में बिजली की मांग एवं उत्पादन में गहरी खाई है। उत्पादन कम होने से पावर कट करना होता है।

सरोज : सर, बिजली का उत्पादन कम होने के क्या कारण है?

कैलाश : कोयले के भंडार सीमित हैं, पर्याप्त वर्षा न होने से पन बिजली घर भी पूर्ण क्षमता उत्पादन नहीं कर पाते, सौर ऊर्जा मंहगी है, गैस से चलने वाले बिजली घरों को भी पूरा ईधन नही मिल पाता, परमाणु बिजली का योगदान भी 3 प्रतिशत ही है।

शिप्रा : सर, परमाणु बिजली घर हर प्रदेश में क्यों नहीं लगाए जा रहे?

कैलाश : राजस्थान, उत्तरप्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, कर्नाटक में 22 परमाणु रिएक्टर 6780 मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता रखते हैं। भारत सरकार ने 10 नए रिएक्टर लगाने की स्वीकृति दे दी है। गोरखपुर (हरियाणा) एवं चुटका (मध्य प्रदेश) में शीघ्र ही निर्माण कार्य प्रारम्भ हो जाएगा। इन राज्यों में भी यूरेनियम से बिजली बनने लगेगी।

रवीना : सर, रेडियेशन से हमें हानि भी होती होगी?

कैलाश : रेडियेशन से सुरक्षा हेतु डिजाइन प्रचालन में पूरी सावधानी रखी जाती है। हर कर्मचारी की रेडियेशन मात्रा का रिकार्ड रखा जाता है एवं सुरक्षा की दृष्टि से अनुमत सीमा का लक्ष्मण रेखा के समान पालन होता है।

प्राचार्या : सर, इन्हें रेडियेशन के बारे में कुछ विस्तार से बतलाइए, इन छात्राओं की विज्ञान में विशेष रूचि है।

कैलाश : रेडियेशन की यूनिट मिली रेम है। बिजली घर में काम करने वाले कर्मचारी को प्रति वर्ष 3000 मिलीरेम रेडियेशन दिया जा सकता है। दैनिक वेतन भोगी हेतु यह सीमा 1500 मिलीरेम वार्षिक रखी गई है।

सीमा : सर, इतने रेडियेशन से स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव तो नहीं पड़ता?

कैलाश : सीमा, बिल्कुल नहीं, देखो मैंने स्वयं 38 वर्ष परमाणु बिजली घर में काम करते हुए हजारों मिलीरेम विकिरण लिया है, पर आज 70 वर्ष की आयु में भी मैं पूर्ण स्वस्थ हूॅ। नियंत्रित अनुमत सीमा में रेडियेशन से कोई हानि नहीं होती।

मोनिका: सर, रेडियेशन क्षेत्र में काम करते समय आप क्या सावधानी रखते थे?

कैलाश : पूरी तैयारी से काम करने जाते थे, प्लास्टिक सूट बायलर सूट में जाते थे, स्वास्थ्य भौतिकी विभाग उस क्षेत्र में रेडियेशन सर्वे कर हमें जितने समय की अनुमति देता था, उतने ही समय वहां रहते थे। फ्रेश एयर लाइन सप्लाई से शुद्ध वायु से ही सांस लेते थे।

साधना : सर, फिर पर्यावरण सर्वेक्षण प्रयोगशाला की क्या भूमिका है?

कैलाश : प्रत्येक परमाणु बिजली घर स्थल पर यह प्रयोगशाला वायु, जल, भूमि, खाद्य एवं कर्मचारियों का निरीक्षण करती है एवं कर्मचारियों, आस-पास रहने वाली जनता एवं वातावरण की सुरक्षा सुनिश्चित करती है।

उपमा मेडम: सर, फिर इतने विरोध क्यों हो रहे हैं?

कैलाश : अधूरी एवं गलत जानकारी के कारण, कुछ असामाजिक संस्थाऐं कुप्रचार कर रही हैं। विषय के विशेषज्ञ एवं काम करने वाले कर्मचारी के अनुभव स्वत: ही सही संतुलित जानकारी दे सकते हैं। भ्रम, संदेह, शंका को दूर कर सही व्यक्ति से जानकारी लेने से सभी प्रश्नों के उत्तर मिल सकते हैं।

स्तुति : सर, भविष्य में क्या परमाणु बिजली घर पावर कट समाप्त करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाऐंगे?

कैलाश : निश्चय ही, शनै: शनै: जब परमाणु बिजली घरों का योगदान वर्तमान 3 प्रतिशत से बढ़कर 5-10-20 प्रतिशत तक पहुंचेगा, तो कई अंधेरे घरों को रोशनी मिलेगीं। राजस्थान एवं गुजरात में 4 रिएक्टर का निर्माण कार्य प्रगति पर है एवं इनके पूरे होने पर 2800 मेगावाट अतिरिक्त बिजली मिलने लगेगी।

(सभी बच्चे करतल ध्वनि करते हैं)

प्राचार्या: स्कूल प्रबंधन कैलाश सर का कृतज्ञ है कि उन्होंने नन्हे भामाशाह की भूमिका में छात्राओं को स्टेशनरी भी दी, साथ ही परमाणु ऊर्जा से सम्बन्धित छात्राओं की जिज्ञासाओं का सरल शैली में समाधान किया, धन्यवादए सर। हम भविष्य में भी आपकी सेवाऐं लेते रहेंगे।

(कैलाश एवं सभी शिक्षिकाऐं जलपान हेतु प्राचार्या कक्ष में जाते हैं)

परिचय - दिलीप भाटिया

जन्म 26 दिसम्बर 1947 इंजीनियरिंग में डिप्लोमा और डिग्री, 38 वर्ष परमाणु ऊर्जा विभाग में सेवा, अवकाश प्राप्त वैज्ञानिक अधिकारी