हिन्दू समाज और कांग्रेस

उमा भारती जी ने बयान दिया है कि गांधी जी की हत्या के बाद सबसे ज्यादा फायदा कांग्रेस को हुआ। राजनीतिक लोग अपनी अपनी सहूलियत के अनुसार बयान देंगे। मगर मैं इतिहासिक दृष्टीकौन से इस बयान पर अपने विचार लिखना चाहूंगा। 1947 का विभाजन धर्म के आधार पर हुआ था। जिन्ना मुसलमानों के पैरोकार बनकर अलग इस्लामिक मुल्क की मांग कर रहे थे। वे मुसलमानों का हित देख रहे थे। हिन्दू समाज का उस काल में व्यवस्थित राजनीतिक प्रतिनिधि नहीं था। हिन्दू महासभा अभी प्रारंभिक अवस्था में था। इसलिए हिन्दुओं ने कांग्रेस के पर आंख बंदकर विश्वास कर लिया। कांग्रेस में केवल सरदार पटेल हिन्दुओं के समर्थक थे। वहीं गाँधी, नेहरू और मौलाना कलाम दूसरे छोर पर खड़े थे। 1947 से पहले पाकिस्तान के शेखुपुरा और रावलपिंडी में हिन्दुओं का नरसंहार देखकर सरदार पटेल  को आभास हो चूका था कि हिन्दू-मुस्लिम जनता को अदला-बदली शांतिपूर्वक रूप से तो कभी नहीं होगी। हिन्दुओं की रक्षा में वीर सावरकर, भाई परमानन्द और मदन मोहन मालवीय जी प्रभावशाली रूप से सक्रिय थे। जस्टिस मेहरचंद महाजन ने लाहौर को भारत में मिलाने का प्रस्ताव नेहरू से किया था। जिस पर नेहरू ने ध्यान नहीं दिया। 85% हिन्दू बहुलता वाला लाहौर में धर्म के नाम पर ऐसा नंगा नाच हुआ। जिसे देख कर लोगों का मानवता से  विश्वास उठ जाये। जिन्ना ने जिस प्रकार से कश्मीर में कबायली लड़ाके भेजे थे। वैसे ही थरपारकर जो सिंध का हिन्दू बहुल जिला था। उसमें भी भेजे थे। वहां के हिन्दू राजपूत राजा ने जिन्ना से समझौता कर हिन्दू बहुल जिले को पाकिस्तान में मिला दिया। जिसका खामियाजा आज भी वहां की हिन्दू जनता भुगत रही हैं। मुसलमानों के अत्याचारों से सरदार पटेल का कांग्रेस पर विस्थापित हिन्दुओं की सहायता करने का दवाब बढ़ता गया। निरपराध हिन्दुओं को भूखे इस्लामिक कातिलों के समक्ष मरने, लूटने के लिए फेंक देने का दोष हिन्दुओं ने गाँधी, नेहरू और कांग्रेस को दिया। जो गाँधी जी कहते थे कि भारत का विभाजन मेरी लाश के ऊपर होगा, जो नेहरू यह कहते थे कि हिन्दुओं आराम से लाहौर में रहो। लाहौर भारत का भाग बनेगा। वहां न केवल हिन्दुओं की व्यापक हानि हुई, सामूहिक बलात्कार तो आम बात थी। हिन्दू कन्याओं को नंगा कर सड़कों पर घुमाया गया।  हिन्दुओं का पीढ़ियों से नमक खाने वाले मुस्लिम नौकरों ने खोज खोज कर छुपाई गई हिन्दू लड़कियों के पते मुस्लिम दंगाइयों को बताये। हिन्दू लुटते पीटते जाने कैसे दिल्ली आने वाली रेलगाड़ियों में चढ़े तो उन्हें भी लुटा गया। इस नंगे नाच का परिणाम यह निकला कि गाँधी जी की लोकप्रियता उस काल में उनके जीवन के निम्न स्तर पर आ गई। कांग्रेस को लगने लगा था कि उसका जनाधार खिसकता जा रहा है।  देश की राजधानी दिल्ली शरणार्थियों के अस्थायी टेंटों के शहर में परिवर्तित हो गई। गाँधी जी ने हिन्दुओं के घावों पर नमक लगाने के लिए पाकिस्तान को 56 करोड़ रुपये की सहायता देने का प्रण ले लिया। इससे रोषित होकर नाथूराम गोडसे ने 30 जनवरी, 1948 को गाँधी जी की हत्या कर दी। इस घटना से कांग्रेस को मानो मुंह मांगी मुराद मिल गई। कांग्रेस ने अप्रासंगिक हो चुके गाँधी जी को शहीद घोषित कर दिया।  विभाजित भारत में जहां हिन्दुओं को राजनीतिक वरीयता मिलनी थी। उसे हिन्दुओं से छीन लिया गया। जो सरदार पटेल पीड़ित हिन्दुओं की सहायता करने, उनके पुनर्वास के लिए के लिए प्रेरित थे। उन पर गाँधी जी की हत्या को लेकर नेहरू ने दबाव बनाया। कहां विस्थापित और पीड़ित हिन्दू समाज की सहायता सरकार को करनी थी। उसके विपरीत हिन्दू समाज को गाँधी जी का हत्यारा सिद्ध कर दिया गया। वीर सावरकर सरीखे हिन्दू नेताओं को पकड़ कर जेल में डाला गया और संघ पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया। कांग्रेस का उद्देश्य राष्ट्रवादी हिन्दुओं को आतंकित करना था। हिन्दुओं को उनके अधिकारों के स्थान पर गाँधी जी की हत्या का दोषी करारा देना था। इस अवसर का कांग्रेस ने बखूबी लाभ उठाया। भारत को हिन्दू राज्य के स्थान पर सेक्युलर सिद्ध कर दिया। जिन मुसलमानों ने भारत का विभाजन करवाया था। उन्हें अल्पसंख्यक के नाम पर विशेष सुविधाएँ दी। कश्मीर मामले को भी UNO में ले जाकर नासूर बना दिया। मुसलमानों को पाकिस्तान में धकेलने के स्थान पर मिन्नतें कर कर रुकवाया। भारत अगर विशुद्ध हिन्दू राष्ट्र होता तो इजराइल के समान उन्नत राष्ट्र होता। स्वतंत्रत भारत में अंग्रेजों की फुट डालों, राज करो की नीति को यथास्थिति बनाये रखने के लिए मुसलमानों को प्रोत्साहित किया गया। हिन्दु कोड बिल बनाकर हिन्दुओं की जनसंख्या पर रोक लगाई मगर मुसलमानों को जनसंख्या बढ़ाने के लिए पूरा अवसर प्रदान किया। इतिहास का पाठयक्रम ऐसा बनाया गया कि हिन्दू सदा इस्लामिक महान आक्रांताओं से पीटते आये। हिन्दू राजा सदा आपस में लड़ते रहते थे। हिन्दू समाज अन्धविश्वास और छुआछूत से पीड़ित था। इस शिक्षाप्रणाली असर यह निकला कि हिन्दू समाज न केवल यह भूल गया कि उसके साथ पिछले 1200 वर्षों से क्या क्या अत्याचार हुआ, अपितु अत्याचार का विरोध करना भी भूल गया। कहां कहां तक लिखें।
वर्तमान में भी कांग्रेस का यही हिन्दुओं को पीछे से घात करने का खेल अविरल जारी है। कांग्रेस के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह मुसलमानों का भारत के संसाधनों पर पहला हक बताते है।  कांग्रेस के पूर्व गृहमंत्री शिंदे हिन्दुओं को भगवा आतंकवादी बताते है। दो करोड़ बंगलादेशी मुसलमानों को देश में अवैध रूप से बसाकर हिन्दुओं का जनसंख्या समीकरण बिगाड़ दिया। केरल, बंगाल, आसाम, कश्मीर में हिन्दुओं को अल्पसंख्यक बना दिया।
अब भी अगर उमा भारती जी का बयान सही नहीं है तो कब होगा?
डॉ विवेक आर्य