एक प्रतिज्ञा

एक प्रतिज्ञा आज करें हम,
मिलकर कदम बढ़ाएंगे,
कड़वे सच से दूर रहें हम,
झूठ कभी नहीं मुख से बोलें.

 

एक प्रतिज्ञा आज करें हम,
कुसंगति से दूर रहें,
सुसंगति से नाता जोड़ें,
औरों का हम भला करें.

 

एक प्रतिज्ञा आज करें हम,
कक्षा को हम साफ रखें,
विद्यालय को साफ बनाकर,
विद्यालय का मान रखें.

 

एक प्रतिज्ञा आज करें हम,
तन-मन-धन से जुट जाएं,
मान करेंगे गुरुजनों का,
सच्ची शिक्षा हम पाएं.

 

एक प्रतिज्ञा आज करें हम,
कहा बड़ों का हम मानें,
उनके श्रेष्ठ अनुभवों से हम,
इस दुनिया को पहचानें.

 

एक प्रतिज्ञा आज करें हम,
सुनागरिक बन दिखलाएंगे,
राष्ट्र-एकता सुदृढ़ करके,
निज कर्त्तव्य निभाएंगे.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।