तुमने ही सिखलाया

सेवा करना सदा सभी की,
तुमने ही सिखलाया बापू।
दीन जनों को गले लगाना,
तुमने ही सिखलाया बापू॥
बुरा न बोलो, बुरा न देखो,
बुरा न सुनो बताया बापू।
तन-मन-धन से हिंसा छोड़ो,
तुमने ही सिखलाया बापू॥

 

छुआछूत का भाव मिटाकर,
रहना हमें सिखाया बापू।
कमजोरों का साथ निभाओ,
तुमने ही बतलाया बापू॥
सत्य का साथ न छोड़ो चाहे,
दुःख हो यह समझाया बापू।
राष्ट्र एकता हेतु प्राण दे,
सबको पाठ पढ़ाया बापू॥

 

गर्व कभी नहीं करना कोई,
तुमने ही बतलाया बापू।
स्वाभिमान को कभी न भूलो,
ऐसा ज्ञान सिखाया बापू॥
जो कहते थे वही स्वयं भे,
तुमने कर दिखलाया बापू।
इसीलिए हैं कोटि नमन हे,
विश्ववंद्य कृशकाया बापू॥

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।