कविता- ख्वाब तेरे

कितने दिनों बाद दिखे तुम ,कहां थे तुम

न कोई खत न कोई खबर
कही और तय कर रहे थे सफर
दिन रात तुम्हे ही याद किया
न जाने कितना इंतजार किया
वो भुला दी बाते मैंने जब तुम नाराज हुए थे
मगर अब मान भी जाओ जरा
कितना तन्हा वक़्त गुजरा है तेरे बिन
ये इन सूनी आंखों से पूछो
कितने जागे है हम ये उस रात से पूछो
उन तारो से पूछो उस अन्धेरी रात से पूछो
उस अकेले चांद से पूछ, हर रोज घंटो चांद से
बाते अनगिनत की है मैने
हम दोनो का हाल एक जैसा ही था
वो अपनी चांदनी से दूर था
और मैं तुम मुझसे दूर थे कही।।
उपासना पाण्डेय (आकांक्षा)
     हरदोई (उत्तर प्रदेश)

परिचय - उपासना पाण्डेय

पूरा नाम- आकांक्षा पाण्डेय उपनाम- उपासना जन्मस्थान-आजाद नगर हरदोई (उत्तर प्रदेश) लौकिक शिक्षा-स्नातक(बी.एस.सी. ) लेखन-2017 जून से अभी तक. वर्तमान लेखन- दैनिक और साप्ताहिक अखबारों में कविताये,शब्दनगरी ,प्रतिलिपी वेबसाइट पर,मासिक पत्रिका,चहकते पंछी ब्लॉग पर कविताये।