कहानी

टाई और धोती

वो बालों में तीसरी बार कंघी फेर रही थी, मगर फिर भी संतुष्ट नहीं थी। एक ओर के बाल उसे उठे-उठे लग रहे थे। उसने बालों में लगा छोटा सा क्लिप फिर खोल दिया। सिर के बीचों-बीच बंधे चुटकी भर बाल फिर छूट कर कानों के पास आ गिरे। उसने शीशे में ताकती अपनी ही […]

गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल

ना करो तुम हिसाब रहने दो, अच्छी हैं या खराब रहने दो दिल का क्या है थोड़ा पागल है, इसकी बातें जनाब रहने दो चलो काँटों की बात करते हैं, आज ज़िक्र-ए-गुलाब रहने दो जीने के लिए ज़रूरी है, मेरी आँखों में ख्वाब रहने दो पढ़ना है तो कोई चेहरा पढ़ो, ये मोटी-सी किताब रहने […]

सामाजिक

व्रत और उपवास

व्रत या उपवास हम बचपन से सुनते और देखते आये हैं, सबसे पहले मंगलवार को हनुमान जी का व्रत सुना था , फिर करवा चौथ , शुक्रवार को माता संतोषी का व्रत, माता वैभव देवी का व्रत, नवरात्रे का व्रत , आदि और सभी व्रत हमारी धार्मिक आस्था से जुड़े हैं,व्रत आदि परम्परागत धरणाओं के […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

क्यों पिलाते हो मुझे जाम कोई और फिर देते हो इलज़ाम कोई। ख़ौफ़े रुसवाई से डर जाता हूँ जब भी लेता है तेरा नाम कोई। मेरा अंदाज़ अलग है तुमसे चाहिये मुझको नई शाम कोई ज़िन्दगी जब से बसी है अपनी न कोई सुख है न आराम कोई उसके बिन मैं हूँ अधूराकब से उनको […]

मुक्तक/दोहा

“साली रस की खान”

सम्बन्धों का है यहाँ, अजब-गजब संसार। घरवाली से भी अधिक, साली से है प्यार।। — अपनी बहनों से नहीं, करते प्यार-अपार। किन्तु सालियों से करें, प्यारभरी मनुहार।। — जीजा-साली का बहुत, होता नाता खास। जिनके साली हैं नहीं, वो हैं बहुत उदास।। — साली से है अनुराग है, सालों से ससुराल। साली जीजा का रखे, […]

कविता

बेटियाँ

फूल – कलियों – सी होती हैं बेटियाँ चाँद की चांदनी – सी होती हैं बेटियाँ मत तोडो इन्हें मत घूरो इन्हें नजर लग जाती है मुरझा जाती हैं बड़ी कोमल होती हैं बेटियाँ || प्यार – दुलार – स्नेह की भूखीं होती हैं मरूस्थल में भी बड़ी हो जाती हैं भार नहीं होती हैं […]

लघुकथा

साक्षात्कार

एक बीस बाइस वर्ष का युवा भरे बाजार में साइकिल चलाता गुज़रता है, जहां भीड़ का अंत नहीं । वह घंटी टनटनाता तेज रफ़्तार आता है। वह समझता है कि घंटी सुनकर सब उसे रास्ता दे देंगे।  भीड़ अपनी निकलने की राह बनाती जैसे तैसे चलती जा रही है। सवार एक बूढ़े के पैर को कुचलता […]

राजनीति

नोटबंदी और जीएसटी

विगत कई दिनों से नोटबंदी और जीएसटी के कारण बाजार पर होने वाले दुष्प्रभावों पर चर्चा का बाजार गर्म है। निश्चित तौर पर नोटबंदी के दौरान पैसों की अनुपलब्धता व कुछ बैकों द्वारा बरती गयी अनियमितता ने सरकार की उन उम्मीदों को ध्वस्त कर दिया था कि इससे वह कालाधन वापस ला पायेगी। मगर इन […]

लघुकथा

यह मेरा घर

”सुलू,मेरी नीली शर्ट कहाँ रखी है ?”बाथरूम से निकलते हुए राज माहेश्वरी ने पत्नी को आवाज़ लगायी और ड्रेसिंग टेबल के सामने खड़े बाल काढ़ने लगे ! “बेड पर देखिये आपकी शर्ट,ट्राउज़र,पर्स,मोबाईल और रुमाल सब वहीँ रखें हैं !”आलू का परांठा तवे पर पलटते हुए रसोई से ही सुलोचना ने जवाब दिया ! तब तक […]

लघुकथा

नीम की दातुन

माही ने सारे छोटे गमले ट्रक में सामान के साथ लडवा कर नए फ्लेट की बालकनी में रखवाने को भेज दिए थे ! एक बार अपनी बगिया को बड़े ममत्व से निहारा मानो बगिया की हरितिमा को आँखों से घूँट-घूँट पी रही हो ! फिर बगिया के साथ अपनी और अपनी सात वर्षीया पोती इना […]