Monthly Archives: October 2017

  • बचपन

    बचपन

      बहुत नाचे ,बहुत खेले वो कांटे भी बहुत झेले वो सरसों का खेत पिला अब मुझे बुलाता है वो बचपन का था इतराना मुझे अब याद आता है सभी की बात होती थी गजब की...

  • संदेश

    संदेश

    मेरा संदेश सुनो जरा कान खोलो चुप क्यूँ हो बैठे? अब कुछ तो बोलो लुटता संसार दिखे वहशी घुमे रात को मशाल उठा ली है देदो अब साथ तो किसी अपराधी को धर्म से ना तोलो...

  • टाई और धोती

    टाई और धोती

    वो बालों में तीसरी बार कंघी फेर रही थी, मगर फिर भी संतुष्ट नहीं थी। एक ओर के बाल उसे उठे-उठे लग रहे थे। उसने बालों में लगा छोटा सा क्लिप फिर खोल दिया। सिर के...

  • गज़ल

    गज़ल

    ना करो तुम हिसाब रहने दो, अच्छी हैं या खराब रहने दो दिल का क्या है थोड़ा पागल है, इसकी बातें जनाब रहने दो चलो काँटों की बात करते हैं, आज ज़िक्र-ए-गुलाब रहने दो जीने के...

  • व्रत और उपवास

    व्रत और उपवास

    व्रत या उपवास हम बचपन से सुनते और देखते आये हैं, सबसे पहले मंगलवार को हनुमान जी का व्रत सुना था , फिर करवा चौथ , शुक्रवार को माता संतोषी का व्रत, माता वैभव देवी का...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    क्यों पिलाते हो मुझे जाम कोई और फिर देते हो इलज़ाम कोई। ख़ौफ़े रुसवाई से डर जाता हूँ जब भी लेता है तेरा नाम कोई। मेरा अंदाज़ अलग है तुमसे चाहिये मुझको नई शाम कोई ज़िन्दगी...

  • “साली रस की खान”

    “साली रस की खान”

    सम्बन्धों का है यहाँ, अजब-गजब संसार। घरवाली से भी अधिक, साली से है प्यार।। — अपनी बहनों से नहीं, करते प्यार-अपार। किन्तु सालियों से करें, प्यारभरी मनुहार।। — जीजा-साली का बहुत, होता नाता खास। जिनके साली...

  • बेटियाँ

    बेटियाँ

    फूल – कलियों – सी होती हैं बेटियाँ चाँद की चांदनी – सी होती हैं बेटियाँ मत तोडो इन्हें मत घूरो इन्हें नजर लग जाती है मुरझा जाती हैं बड़ी कोमल होती हैं बेटियाँ || प्यार...

  • साक्षात्कार

    साक्षात्कार

    एक बीस बाइस वर्ष का युवा भरे बाजार में साइकिल चलाता गुज़रता है, जहां भीड़ का अंत नहीं । वह घंटी टनटनाता तेज रफ़्तार आता है। वह समझता है कि घंटी सुनकर सब उसे रास्ता दे देंगे। ...