कविता

नास्तिक

वो नास्तिक ही सही कहीं ईमान तो रखता है … इंसानियत के नाते , इंसान की पहचान तो रखता है, नहीं करता कोई पूजा, ना ही कोई आडम्बर करता है, पर आन पड़े ज़रुरत तो हर गरीब की मदद करता है, ना तेरा मेरा ,ना छोटा बड़ा . सबको एक आँख से तकता है, सब […]

उपन्यास अंश

इंसानियत – एक धर्म ( भाग – अडतीसवां )

मुनीर बड़ी देर तक उस उद्यान की मखमली घास पर बैठा पुलिस की गिरफ्त में आने से बचने के उपाय सोचता रहा । वह कई योजनाओं पर विचार कर चुका था लेकिन उसे अपनी हर योजना में कोई न कोई खामी नजर आ रही थी । अंततः उसने काफी देर की सोच विचार के बाद […]

गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल

करे इंसान क्या जब रास्ता कोई नहीं होता, बना देती है मजबूरी बुरा कोई नहीं होता गम किस बात का हो गई जो गलतियां हमसे, आखिर आदमी हैं सब खुदा कोई नहीं होता सब मतलब के रिश्ते हैं किसी को आज़माना मत, ज़रूरतमंद का साथी यहां कोई नहीं होता रब मिल जाए जो मुझको कहीं […]

लघुकथा

लघुकथा – दिवाली का उपहार

मंत्रीजी सौफे पर पड़े – पड़े टेलीविजन के चैनल बदल रहे थे, तभी उनका निजी सहायक भोला राम अपने माथे पर चिंता की लकीरें खीचे हुए आ पहुंचा… | ‘ सरजी…! आप चिन्तामुक्त होकर टी. वी. देख रहे हैं | सारे देश में अब आपकी आलोचना होनी शुरू हो गयी है, जिस तरह आपने पिछले […]

गीत/नवगीत

गीत-“देखो-देखो यह खिला चाँद”

देखो-देखो यह खिला चाँद. क़िस्मत से मुझको मिला चाँद. पहले चाहों में साथ रहा. मेरी राहों में साथ रहा. जब खिड़की खोली कमरे की, घंटों बाँहों में साथ रहा. मन झील सरीखा है अब भी, है जहाँ रहा झिलमिला चाँद. फिर पड़ी अमावस दूर गया. पर ख़ुशियाँ दे भरपूर गया. मैं तन से मन तक […]

बाल कविता

“छुक-छुक करती आती रेल”

धक्का-मुक्की रेलम-पेल। आयी रेल-आयी रेल।। इंजन चलता सबसे आगे। पीछे -पीछे डिब्बे भागे।। हार्न बजाता, धुआँ छोड़ता। पटरी पर यह तेज दौड़ता।। जब स्टेशन आ जाता है। सिग्नल पर यह रुक जाता है।। जब तक बत्ती लाल रहेगी। इसकी जीरो चाल रहेगी।। हरा रंग जब हो जाता है। तब आगे को बढ़ जाता है।। बच्चों […]

कविता

संवाद…

जरूरी नहीं तन्हाईयों का होना भीड़ में भी संवाद करता है मन अपनेआप से हर पल एक मौन स्वर शब्द बनकर देता है आवाज पसरे मन के विलुप्त घेरे में अनगिनत हजारों अच्छे बुरे ख्याल लेते है जन्म समाज परिवार से जुडी अनुकूल बातें विचारों का रूप लेकर व्यवहारिकता में उतर आती है पर कुछ […]

बाल कविता

बालकविता “छाते”

धूप और बारिश से, जो हमको हैं सदा बचाते। छाया देने वाले ही तो, कहलाए जाते हैं छाते।। आसमान में जब घन छाते, तब ये हाथों में हैं आते। रंग-बिरंगे छाते ही तो, हम बच्चों के मन को भाते।। तभी अचानक आसमान से, मोटी-मोटी बूँदें आई। प्रांजल ने उतार खूँटी से, छतरी खोली और लगाई।। […]

सामाजिक

जागरूक जनता ही करेगी स्वच्छ भारत का निर्माण

2 अक्टूबर 2014 को प्रधानमंत्री मोदी द्वारा शुरू किए गए स्वच्छ भारत अभियान को अक्टूबर 2017 में तीन वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। स्वच्छ भारत अभियान के मकसद की बात करें तो इसके दो हिस्से हैं, एक सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर साफ सफाई तथा दूसरा भारत के गाँवों को खुले में शौच से मुक्त करना। बात […]

क्षणिका

त्रासदी है….

त्रासदी है…. क्या छोटा शहर, क्या महानगर… विकृत मानसिकता के व्यक्ति हर जगह पाए जाते हैं । समझ नहीं आता कि स्कूल जाने वाले अबोध बच्चों को पढ़ाई के बारे में समझाएँ या जीवन में आने वाले ख़तरों के बारे में बता कर उनमें असुरक्षा और दूजों के प्रति अविश्वास की भावना पैदा करें । […]