Monthly Archives: October 2017


  • मदद की हकदार

    मदद की हकदार

    असलम बैंक से वापस आ रहा था । खाते में व्याज के रूप में मिली रकम लगभग नौ सौ रुपये उसने नगद निकलवा लिया था । ये वो रकम थी जो उसकी धार्मिक मान्यता के अनुसार...

  • नास्तिक

    नास्तिक

    वो नास्तिक ही सही कहीं ईमान तो रखता है … इंसानियत के नाते , इंसान की पहचान तो रखता है, नहीं करता कोई पूजा, ना ही कोई आडम्बर करता है, पर आन पड़े ज़रुरत तो हर...


  • गज़ल

    गज़ल

    करे इंसान क्या जब रास्ता कोई नहीं होता, बना देती है मजबूरी बुरा कोई नहीं होता गम किस बात का हो गई जो गलतियां हमसे, आखिर आदमी हैं सब खुदा कोई नहीं होता सब मतलब के...




  • संवाद…

    संवाद…

    जरूरी नहीं तन्हाईयों का होना भीड़ में भी संवाद करता है मन अपनेआप से हर पल एक मौन स्वर शब्द बनकर देता है आवाज पसरे मन के विलुप्त घेरे में अनगिनत हजारों अच्छे बुरे ख्याल लेते...