Monthly Archives: November 2017

  • do kavitayen

    do kavitayen

      शब्दों के पुल   बुरे होते हैं , शब्दों के जाल , उलझ जाता है आदमी , फंस जाता है , मकड़ी की तरह , निकल नहीं पाता फिर बाहर सरलता से……, मगर…, शब्दों के...


  • मीत जागते रहो

    मीत जागते रहो

    वसुंधरा करे पुकार, मीत जागते रहो कि लौट जाए ना बहार, मीत जागते रहो उमड़ रहे हैं उपवनों में, कंटकों के काफिले करें न कलियों पर प्रहार, मीत जागते रहो समंदरों की सैर को सँवर रहीं...

  • तुम्हारी मुहब्बत में….

    तुम्हारी मुहब्बत में….

    तुम्हारी मुहब्बत में…… एक किताब सी हो गई हूं मैं हर कोई देखकर चेहरा मेरा पढ़ लेता है हाले-दिल व्या….. बदले -बदले से अंदाज मेरे बेवजह हंसती मुस्कुराती हूं खोई-खोई सी रहती अपनेआप में होश हवास...

  • शैर – अलका जैन

    यूं गुजरने को तो उम्र गुजर ही जायेगी। गर चैन से गुजरती तो जिन्दगी होती। ळळळ दिल के दर्द को इस तरह छुपाया मैंने, कि जैसे दामने दाग छुपाते हैं लोग। ळळळ दर्दो गम में अश्क...


  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    पन्नों में खो गई अकेली, हाथन लगी किताब सहेली निकलूँ कैसे बाहर बतला, छोड़ न पाती तुझे नवेली दरवाजा तो खोला तुमने, जाने पर मुँह मोड़ा तुमने निकली थी देखन चौराहा, छोड़ तुझे हो गई अकेली॥...



  • गज़ल

    गज़ल

    बात से बात चले तो ये स्याह रात कटे चाँद कुछ और ढले तो ये स्याह रात कटे ========================== सोए हुए सूरज से माँग करके थोड़ा सा उजाला मुँह पे मले तो ये स्याह रात कटे...