बाल कहानी

मिलावटखोर को सबक (बाल कहानी)

गुटपुट खरगोश के दफ्तर में आज छुट्टी थी। वह घर में लेटा-लेटा बोर हो रहा था सो उसका मन कुछ बढ़िया खाने का हुआ। अपनी बीवी गप्पी से पूछा “अजी, खीर बना सकती हो?” गप्पी प्यार से मुस्कुरा के बोली “लो, बना क्यों नहीं सकती? बस चावल ले आओ खीर वाले, वही घर में नहीं […]

इतिहास

बच्चूसिंह के जन्म दिवस (30 नवम्बर) पर विशेष

आज बच्चूसिंह के जन्म दिवस की वर्षगाँठ है। इस अवसर पर उनके बारे में जानकारी प्रस्तुत है। गिर्राज शरण सिंह, अर्थात् बच्चूसिंह, जिन्होंने विकलांगों को प्रतिनिधित्व दिया, भरतपुर के विकलांग (CP) राजकुमार थे। उनके पिता महाराजा किशनसिंह के विश्वासपात्रों ने बचपन से ही बच्चूसिंह सर्वोच्च आयुर्वेदिक चिकित्सा व क्षत्रिय प्रशिक्षण दिलवाया जिससे वे अपनी विकलांगता […]

कुण्डली/छंद

मुक्तहरा

जिसे तुम देख रहे विकलांग उसे मत मान कभी कमजोर। करे यदि कोशिश ला सकता वह जीवन में कल नूतन भोर। रचे नित ही इतिहास यहाँ पर थाम चले कर जो श्रम डोर। सदा वह मंजिल प्राप्त करे अपनी तम हो कितना घनघोर।। पीयूष कुमार द्विवेदी ‘पूतू’

कविता

” मौसम “

  मौसम भी बड़ा अजीब है ! इसकी फितरत को , कौन जान पाया है !! मौसम कभी गाता है , गुनगुनाता है ! कभी खामोश , सफेद चादर ओढ़ , कंपकंपाता है ! कभी तमतमाकर , तपता है , तपाता है ! दहकता है , दहकाता है !! कभी बिखेर देता है खुशबू , […]

लघुकथा

नज़रों की आवाजाही को ब्रेक

शादी सम्पन्न होने के बाद निशिता की विदाई होने वाली थी. दोनों परिवारों की अनुमति से यह प्रेम विवाह सुनियोजित विवाह की तरह सम्पन्न हुआ था. फिर भी विदाई की भावुक बेला ने निशिता और उसके मायके के पूरे परिवार को जहां अत्यंत भावुक कर दिया था, वहीं ससुराल वाले प्रसन्नता से निशिता की राहों […]

हास्य व्यंग्य

खट्ठा-मीठा : धर्म अफीम है!

बाबा कार्ल मार्क्स बहुत पहले लिखकर रख गये हैं कि धर्म अफीम है। हमारे कामरेड भाई इस मंत्र को दिन में दस बार दोहराते रहते हैं। यह बात अलग है कि दोहराने के साथ ही इसका अर्थ भूल जाते हैं और फिर जालीदार टोपी पहनकर रोजा अफ्तार करने चल देते हैं। कई कामरेड तो इस […]

कविता

कविता

मैं कविता नहीं लिखता मैं उपमा नहीं देता मैं शब्दों में सपने नहीं दिखाता मैं झूठी तारीफ़ के पुल नहीं बांधता हां,,,हां,,,,ये सच है खरा सच है मैं नहीं दूंगा तुम्हें कोई भी छलावा नहीं रखूंगा तुम्हें किसी गलफ़त के पर्दे में मैं पुरूष प्रजाति का एक विचित्र जीव हूं जो तुम्हारा स्वाद और रस […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

संग बिताया जमाना हमसे भूला न जायेगा ! किये वादे जो तुमने हमसे कौन निभायेगा!! मैने गलियां करी गुलजार तुम्हारी रो रो कर ! यही सोचकर अक्सर दिल मेरा घबड़ायेगा !! कत्ल करने से पहले तुमने कुछ सोचा नही ! कातिल का पता कातिल खुद ही बतायेगा !! सांसो का कारवां अगर यूं ही चलता […]

गीतिका/ग़ज़ल

बुलाना होगा

कदम-कदम पर जाना होगा दिल का दर्द छुपाना होगा किसकी आँखो में हैं प्यार नजरें देख चुराना होगा तकती रहती वो एक नज़र लगता प्यार पुराना होगा दिल दे दिया मुझको उसने सोचा  शख्स बुरा ना होगा यदि नहीं हाले दिल मंजूर फिर से प्यार लौटाना होगा बिन प्रेम-प्यार के पतंग उड़ाए ऐसे ना कोई […]

कविता

कविता

हे औरत! यह काँटो की सेज हैं तुम अपने को सहेज हे जमाने! यह औरत हैं किसी मर्द का औजार नहीं सताए कोई भी यह तुम्हें अधिकार नहीं औरत हैं खूबसूरत खुशियों की पेटी किसी की तो होगी माँ-बाप की बेटी निकल रही मन में मर्म वेदना स्तब्ध खड़ा हाथजोड़ सृष्टिपालक सम्मुख अब कोई औरत […]