Monthly Archives: November 2017



  • मुक्तहरा

    मुक्तहरा

    जिसे तुम देख रहे विकलांग उसे मत मान कभी कमजोर। करे यदि कोशिश ला सकता वह जीवन में कल नूतन भोर। रचे नित ही इतिहास यहाँ पर थाम चले कर जो श्रम डोर। सदा वह मंजिल प्राप्त...


  • नज़रों की आवाजाही को ब्रेक

    नज़रों की आवाजाही को ब्रेक

    शादी सम्पन्न होने के बाद निशिता की विदाई होने वाली थी. दोनों परिवारों की अनुमति से यह प्रेम विवाह सुनियोजित विवाह की तरह सम्पन्न हुआ था. फिर भी विदाई की भावुक बेला ने निशिता और उसके...


  • कविता

    कविता

    मैं कविता नहीं लिखता मैं उपमा नहीं देता मैं शब्दों में सपने नहीं दिखाता मैं झूठी तारीफ़ के पुल नहीं बांधता हां,,,हां,,,,ये सच है खरा सच है मैं नहीं दूंगा तुम्हें कोई भी छलावा नहीं रखूंगा...

  • गीतिका

    गीतिका

    संग बिताया जमाना हमसे भूला न जायेगा ! किये वादे जो तुमने हमसे कौन निभायेगा!! मैने गलियां करी गुलजार तुम्हारी रो रो कर ! यही सोचकर अक्सर दिल मेरा घबड़ायेगा !! कत्ल करने से पहले तुमने...

  • बुलाना होगा

    बुलाना होगा

    कदम-कदम पर जाना होगा दिल का दर्द छुपाना होगा किसकी आँखो में हैं प्यार नजरें देख चुराना होगा तकती रहती वो एक नज़र लगता प्यार पुराना होगा दिल दे दिया मुझको उसने सोचा  शख्स बुरा ना...

  • कविता

    कविता

    हे औरत! यह काँटो की सेज हैं तुम अपने को सहेज हे जमाने! यह औरत हैं किसी मर्द का औजार नहीं सताए कोई भी यह तुम्हें अधिकार नहीं औरत हैं खूबसूरत खुशियों की पेटी किसी की...