गजल

रोग जाता ही नहीं कितनी दवा ली हमने
माँ के क़दमों में झुके और दुआ ली हमने

इस ज़माने ने सताया भी बहुत है मुझको
आग ये सीने की अश्कों से बुझा ली हमने

जब नजर आई नहीं ख्वाब में ‘ माँ की सूरत
अपनी आँखों से हर इक नींद हटा ली हमनें

माँ के क़दमों में ये सारा ही जहां दिखता है
बस तेरी याद में हस्ती भी मिटा ली हमने

खौफ था मुझको चरागों से ही घर जलने का
आग ‘राज’ घरों में ही लगा ली हमने

— राज सिंह

परिचय - राज सिंह रघुवंशी

बक्सर, बिहार से कवि-लेखक - हिन्दी & भोजपुरी फिल्म राइटर पीन-802101 raajsingh1996@gmail.com