“चाणक्य वार्ता” के पूर्वोत्तर विशेषांक

देश के तथाकथित प्रबुद्धवर्ग को पूर्वोत्तर भारत के संबंध में न तो कोई ज्ञान है, न ही रुचि । यह कैसी विडम्बना है कि अमेरिका, ब्रिटेन, जापान आदि देशों में घटित छोटी – मोटी घटनाएँ भी लोगों को ज्ञात हो जाती हैं परंतु अपने ही देश के एक महत्वपूर्ण भूभाग की घटनाओं की जानकारी न तो दिल्ली स्थित संचार माध्यम दे पाते हैं, न ही इसमें इनकी कोई रुचि है। दिल्ली के संचार माध्यमों और चैनलों का भूगोल अत्यंत सीमित है I कुछ अपवादों को छोड़कर पूर्वोत्तर  क्षेत्र में किसी चैनल का रिपोर्टर तक नहीं है I कोई आतंकवादी घटना होने पर ही पूर्वोत्तर भारत समाचार चैनलों और पत्र –पत्रिकाओं की सुर्ख़ियों बनता है, अन्यथा ये  आठ राज्य समाचारों से गायब रहते हैं I बुद्धिजीवियों, हिंदी लेखकों, पत्र – पत्रिकाओं, नौकरशाहों के लिए पूर्वोत्तर क्षेत्र वर्जित भूमि रही है I यह अत्यंत हर्ष की बात है कि नई दिल्ली से प्रकाशित होनेवाली पाक्षिक पत्रिका “चाणक्य वार्ता” के सितम्बर और अक्टूबर 2017 के तीन अंक पूर्वोत्तर भारत पर केन्द्रित कर प्रकाशित किए गए हैं I इस ऐतिहासिक कार्य के लिए विद्वान सम्पादक डॉ अमित जैन और अन्य सभी सहयोगी बधाई व साधुवाद के पात्र हैं I पूर्वोत्तर की ज्ञान – गंगा को तो इन तीन अंकों में नहीं समेटा जा सकता परन्तु संपादक द्वारा यह स्तुत्य प्रयास किया गया है कि उसका आचमन करा दिया जाए I पूर्वोत्तर के सभी पक्षों को इस सारस्‍वत अनुष्‍ठान में शामिल करने का प्रयत्न किया गया है । इन तीन अंकों में प्रकाशित रचनाएँ ज्ञानवर्द्धक, उपादेय और पूर्वोत्तर के विविध पक्षों का उद्घाटन करती हैं I पूर्वोत्तर पर आधारित इन अंकों के माध्यम से “चाणक्य वार्ता” पूर्वोत्तर भारत के ज्ञान की खिडकी खोलती है I पूर्वोत्तर विशेषांक-1 असम, मेघालय और त्रिपुरा पर केंद्रित है I इस अंक में इन तीनों राज्यों के सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक वैशिष्ट्य को रेखांकित किया गया है I पूर्वोत्तर विशेषांक-2 अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और मिजोरम पर आधारित है I इस अंक में विद्वान लेखकों ने इन राज्यों के विविध पक्षों का उद्घाटन किया है I  पूर्वोत्तर विशेषांक-3 को मणिपुर और सिक्किम पर केन्द्रित किया गया है I इस अंक में इन दोनों राज्यों के लोकजीवन और सामाजिक – सांस्कृतिक परिदृश्य का शोधपरक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है I अतः इस उपलब्धिपूर्ण आक्षरिक अनुष्ठान में अपनी मेधा- समिधा अर्पित करनेवाले लेखक, सम्पादक एवं सम्पादक मंडल के सभी सहयोगी बधाई और अभिनंदन के पात्र हैं I

 

 

परिचय - वीरेन्द्र परमार

जन्म स्थान:- ग्राम + पोस्ट- जयमल डुमरी, जिला:- मुजफ्फरपुर(बिहार) -843107,
जन्मतिथि:-10 मार्च 1962, शिक्षा:- एम.ए. (हिंदी),बी.एड.,नेट(यूजीसी),पीएच.डी.,
पूर्वोत्तर भारत के सामाजिक,सांस्कृतिक, भाषिक,साहित्यिक पक्षों,राजभाषा,राष्ट्रभाषा,लोकसाहित्य आदि विषयों पर गंभीर लेखन,
प्रकाशित पुस्तकें :-1.अरुणाचल का लोकजीवन(2003)
2. अरुणाचल के आदिवासी और उनका लोकसाहित्य(2009)
3.हिंदी सेवी संस्था कोश(2009)
4.राजभाषा विमर्श(2009)
5. कथाकार आचार्य शिवपूजन सहाय (2010)
7. हिंदी:राजभाषा,जनभाषा,विश्वभाषा (संपादन- 2013)
सम्प्रति:- उपनिदेशक(राजभाषा),केन्द्रीय भूमि जल बोर्ड(भारत सरकार) , भूजल भवन, एन एच- 4,फरीदाबाद- 121001,
मोबाइल- 9868200085, ईमेल:- bkscgwb@gmail.com