मौका

शेठ जमनादास शहर के जानेमाने सर्राफा व्यापारी थे । उन्होंने अपने शोरूम पर तैनात नए दरबान को हटाकर उसकी जगह ‘कम्मो ‘ को काम पर रख लिया था । सुंदर व शालीन भारतीय परिधान में सजी धजी ‘ कम्मो ‘ जब अपने दोनों हाथ जोड़कर ग्राहकों का अभिवादन करते हुए उनके लिए शोरूम का दरवाजा खोलती तो उनकी खुशी देखते ही बनती थी । ‘ कम्मो ‘ एक किन्नर थी । शोरूम पर कई दफा भीख मांगने के लिए आई हुई कम्मो की शालीनता व शराफत देखकर शेठ जी बहुत प्रभावित हुए थे और अपने मैनेजर की शोरूम की सुरक्षा व प्रतिष्ठा जैसी आपत्तियों को दरकिनार करते हुए शेठ जी ने उसकी मदद के लिए ही उसे नौकरी का ऑफर दे दिया ।
मैनेजर को समझाते हुए शेठ जी ने कहा ” बदुकधारी सुरक्षा गार्डों की तैनाती के बावजूद आये दिन दुकानों व बैंकों के लुटे जाने की खबरें आती रहती हैं ऐसे में समाज के इन दबे कुचले व उपेक्षित लोगों को एक मौका दिए जाने में क्या बुराई है ? और देखो वह कितनी खुश है । हमारे ग्राहक भी एक किन्नर का अनोखा रूप देखकर कितने खुश व प्रभावित हैं । “

परिचय - राजकुमार कांदु

मुंबई के नजदीक मेरी रिहाइश । लेखन मेरे अंतर्मन की फरमाइश ।