मुक्तक

प्रणय घड़ी की स्मृतियां, विस्मृत न कर देना,
तन न्योक्षावर मैं कर दूं, फिर छोड़ कभी न देना।
बांह पाश में जकड़ रहे हो, प्रेम पिपासु बन कर,
प्रेम रस का पान कर मधुकर, त्यज कभी न देना।।

बनकर तेरी एकबार, किसी और की न हो पाऊंगी,
छोड़ा जो मुझको तो जानो, जग की न हो पाऊंगी।
कपट प्रेम तेरा ठहरा तो, रोती कहां भ्रमण करूंगी,
वंचक बिन तेरे जग में, पल एक न जी पाऊंगी।।

हांथ पकड़ कर तू मेरा, चेतनत्व तक चलना,
छोड़ कभी मेरा आलिंगन, दूजा बांह न भरना।
ईश्वर से है प्रार्थना, पल भी दूर रहू जो तुमसे,
मन तड़पे बेचैन रहे, आनंद रहित हो रहना।।

🙏🙏🙏🙏🙏
।।प्रदीप कुमार तिवारी।।
करौंदी कला, सुलतानपुर
7537807761

परिचय - प्रदीप कुमार तिवारी

नाम - प्रदीप कुमार तिवारी। पिता का नाम - श्री दिनेश कुमार तिवारी। माता का नाम - श्रीमती आशा देवी। शिक्षा - संस्कृत से एम ए। जन्म स्थान - दलापुर, इलाहाबाद, उत्तर-प्रदेश। मूल निवासी - करौंदी कला, शुकुलपुर, कादीपुर, सुलतानपुर, उत्तर-प्रदेश। इलाहाबाद मे जन्म हुआ, प्रारम्भिक जीवन नानी के साथ बीता, दसवीं से अपने घर करौंदी कला आ गया, पण्डित श्रीपति मिश्रा महाविद्यालय से स्नातक और संत तुलसीदास महाविद्यालय बरवारीपुर से स्नत्कोतर की शिक्षा प्राप्त की, बचपन से ही साहित्य के प्रति विशेष लगव रहा है। समाज के सभी पहलू पर लिखने की बराबर कोशिस की है। पर देश प्रेम मेरा प्रिय विषय है मैं बेधड़क अपने विचार व्यक्त करता हूं- *शब्द संचयन मेरा पीड़ादायक होगा, पर सुनो सत्य का ही परिचायक होगा।।* और भ्रष्टाचार पर भी अपने विचार साझा करता हूं- *मैं शब्दों से अंगार उड़ाने निकला हूं, जन जन में एहसास जगाने निकला हूं। लूटने वालों को हम उठा-उठा कर पटकें, कर सकते सब ऐसा विश्वास जगाने निकला हूं।।*