मुक्तक

प्रणय घड़ी की स्मृतियां, विस्मृत न कर देना,
तन न्योक्षावर मैं कर दूं, फिर छोड़ कभी न देना।
बांह पाश में जकड़ रहे हो, प्रेम पिपासु बन कर,
प्रेम रस का पान कर मधुकर, त्यज कभी न देना।।

बनकर तेरी एकबार, किसी और की न हो पाऊंगी,
छोड़ा जो मुझको तो जानो, जग की न हो पाऊंगी।
कपट प्रेम तेरा ठहरा तो, रोती कहां भ्रमण करूंगी,
वंचक बिन तेरे जग में, पल एक न जी पाऊंगी।।

हांथ पकड़ कर तू मेरा, चेतनत्व तक चलना,
छोड़ कभी मेरा आलिंगन, दूजा बांह न भरना।
ईश्वर से है प्रार्थना, पल भी दूर रहू जो तुमसे,
मन तड़पे बेचैन रहे, आनंद रहित हो रहना।।

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।।प्रदीप कुमार तिवारी।।
करौंदी कला, सुलतानपुर
7537807761

परिचय - प्रदीप कुमार तिवारी

जन्म वर्ष . - 1989 निवास स्थान. - करौंदी कला, शुकुलपुर, सुलतानपुर, उत्तर प्रदेश। माता /पिता. - आशा देवी /दिनेश कुमार तिवारी। शिक्षा. - स्नातकोत्तर संस्कृत विषय से। कविता लिखने का शौक बचपन से ही है, अपने स्वतंत्र बिचारों को कविता के रूप में लिखना मुझे अत्यंत प्रिय है।