Monthly Archives: November 2017



  • बस तुम चले आना

    रात गहरी औ आसमां में छायें सितारे ख्वाहिशों की तरह…. बस तुम चले आना.. ख़यालों में औ चांद कर जायें इशारे दुआ की तरह…. बस तुम चले आना सूनी फिज़ा औ मदहोश हवायें पुकारे धड़कनों की...


  • सच कहूँ

    सच कहूँ

    {1}गरीब की टूटी थाली में झाँक कर देखना नेता जी कभी फुटपाथ पर रोटी माँगकर देखना {2} नेताओं को 5 साल में बस एक ही बार नजर आते!!! फुटपाथ पर रात गुजारने को मजबूर मुद्दे अक्सर...

  • संन्नाटा

    संन्नाटा

    हाँ सन्नाटा अच्छा लगता है कम से कम कुछ सोच लेता हूँ पुराने जख्म की पपडी को खरोंच लेता हूँ अच्छा लगती है वो आहिस्ता से निकलती खून की बूँद इस सन्नाटे में महसूस करता हूँ...