Monthly Archives: December 2017


  • मैं कवि…

    मैं कवि…

    कभी अक्षर की खेती करता कभी वस्त्र शब्दों के बुनता बाग लगाता स्वर-व्यंजन के मात्राओं की कलियां चुनता मैं कवि, कृषक के जैसा करता खेती कविताओं की और कभी बुनकर बन करके ढ़कता आब नर-वनिताओं की...



  • मेरा गांधी से प्रश्न

    मेरा गांधी से प्रश्न

    धुंध भरी रात है ,स्याह अंधकार है दूर दूर तक नही,जीव का निशां है हाथ हाथ को नही यहां पहचानता शब्द भी यहां नही कोई है जानता साथ साथ थे चले मंजिले एक थी फिर अचानक...


  • कहानी – विकलांग

    कहानी – विकलांग

    काठगोदाम से बरेली जाने वाले रेल-मार्ग पर ‘किच्छा’ एक छोटा-सा रेलवे स्टेशन है, काठगोदाम लाइन के लालकुआँ जंकशन से इस लाइन पर बहुत सारी गाड़ियाँ आती-जाती हैं। खास तौर पर बरेली, मथुरा, लखनऊ आदि मार्गों की गाड़ियों का तो...


  • लघुकथा-दोषी कौन है?

    लघुकथा-दोषी कौन है?

    संगीता रोज की तरह आज भी विद्यालय जाने के लिये तैयार हो रही थी। कक्षा आठ में पढ़ती थी संगीता ।उसके पिता किसान थे वो चाहते थे कि उसकी बेटी पढ़कर एक सरकारी अफसर बने और...

  •  आप्त पुरुष का स्वरूप       

    ओ३म् ऋषि दयानन्द के ग्रन्थों में अनेक स्थानों पर आप्त विद्वान पुरुष शब्द का प्रयोग हुआ है। स्वाभाविक है कि इस शब्द को पढ़कर इसका अभिप्राय जानने की इच्छा अवश्य होती है। इसके लिए हमने ‘स्वमन्तव्यामन्तव्य...