ग़ज़ल

स्याह रातों मे नया नूर दिखाने वाला ।
कोई आयेगा मुझे राह बताने वाला ।।

ऐ अंधेरो के बुरे लोग ,कुछ डरो उससे,
कोई आयेगा एक चराग जलाने वाला ।

मैं कोई गीत लिखूँ ,दर्द में डूबा यारों,
कोई आये तो मुझे दर्द सुनाने वाला ।

कई सावन, कई पतझड़, कई मौसम गुजरे,
लौटकर आया नही ,छोड़ के जाने वाला ।

मैं उसे चाँद भला कैसे लिखूँ, बोलो तो,
मैं नही उसमे कोई दाग दिखाने वाला।

शहर में हर तरफ गुबार धुएँ का क्यो है,
नजर आया न कोई आग लगाने वाला ।

डॉ. दिवाकर दत्त त्रिपाठी

परिचय - डॉ दिवाकर दत्त त्रिपाठी

नाम डॉ दिवाकर दत्त त्रिपाठी आत्मज श्रीमती पूनम देवी तथा श्री सन्तोषी . लाल त्रिपाठी जन्मतिथि १६ जनवरी १९९१ जन्म स्थान हेमनापुर मरवट, बहराइच ,उ.प्र. शिक्षा. एम.बी.बी.एस. पता. रूम न. ,१७१/१ बालक छात्रावास मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज इलाहाबाद ,उ.प्र. प्रकाशित पुस्तक - तन्हाई (रुबाई संग्रह) उपाधियाँ एवं सम्मान - साहित्य भूषण (साहित्यिक सांस्कृतिक कला संगम अकादमी ,परियावाँ, प्रतापगढ़ ,उ. प्र.) शब्द श्री (शिव संकल्प साहित्य परिषद ,होशंगाबाद ,म.प्र.) श्री गुगनराम सिहाग स्मृति साहित्य सम्मान, भिवानी ,हरियाणा अगीत युवा स्वर सम्मान २०१४ अ.भा. अगीत परिषद ,लखनऊ पंडित राम नारायण त्रिपाठी पर्यटक स्मृति नवोदित साहित्यकार सम्मान २०१५, अ.भा.नवोदित साहित्यकार परिषद ,लखनऊ इसके अतिरिक्त अन्य साहित्यिक ,शैक्षणिक ,संस्थानों द्वारा समय समय पर सम्मान । पत्र पत्रिकाओं में निरंतर लेखन तथा काव्य गोष्ठियों एवं कवि सम्मेलनों मे निरंतर काव्यपाठ ।