आग मत लगाना

आग घर में लगाना नहीं है
उस धुएँ को बढ़ाना नहीं है

एक बारे लगे जो दिलों में
बस मुहब्बत घटाना नहीं है

बँट गये आज अपने सदा को
पास अब क्यों बुलाना नहीं है

रोज दीवार उठती रहे जो
दूरियाँ ये बढाना नहीं है

दीखता है नहीं वो अदब अब
बाप से मुँह चलाना नहीं है

मात ने जन्म तुझको दिया जब
बात कुछ पर सताना नहीं है

तू सहन शीलता को दिखाए
धैर्य क्यों फिर बढ़ाना नहीं है

बात इतनी मधुर कर हमेशा
शूल तुझको चुभाना नहीं है

मान करना न सीखे कभी तू
पशु तुझे अब बनाना नहीं है

परिचय - डॉ मधु त्रिवेदी

जन्म तिथि --25/05/1974 पद ---प्राचार्या शान्ति निकेतन काॅलेज आॅफ बिज़नेस मैनेजमेंट एण्ड कम्प्यूटर साइन्स आगरा email -madhuparashar2551974@gmail.com रूचि --लेखन कवितायें ,गजल , हाइकू 20 से अधिक प्रकाशित Reference Books --"टैगोर का विश्व बोध दर्शन नागार्जुन के काव्य साहित्य में प्रगतितत्व अन्य Text Books