वृक्ष हैं प्रकृति का श्रृंगार

वृक्ष
हैं
प्रकृति का श्रृंगार
परमात्मा का प्यार
परोपकार की सुरम्य सरिता
आकाश से उतरी हुई
जीवंत कविता
अनेकानेक जीवों के
आश्रयदाता
विभिन्न व्यवसायों को
पनपाने वाले
जीवनदाता
पर्यावरण के पोषक
वायु प्रदूषण के शोधक
फल-फूलों के भंडार
अन्न-दालों के आगार
सब्ज़ियों के सरताज
जड़ी-बूटियों के बादशाह बेताज
मौसम के संरक्षक
मिट्टी के कटाव के नियंत्रक
शीतलता के संप्रेषक
सुखदाई छाया के वितरक
संवेदनशील साधक
मौन आराधक
सजावट के सेवक
उपकार के प्रेरक
हरियाली का गीत
खुशहाली का संगीत
धूप से त्राता
फर्नीचर और ईंधन हेतु लकड़ी के दाता
कृषक की आशा
स्नेह की भाषा.
आइए,
इस भाषा को जानें
वृक्षों की महत्ता को पहचानें
अधिकाधिक वृक्ष लगाएं
इस प्रकार
प्रकृति की इस सुंदर देन को
समृद्ध बनाएं
महकीली सृष्टि को
और भी महकाएं.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।