मुक्तक/दोहा

“दोहा मुक्तक”

पारिजात सुन्दर छटा, शम्भू के कैलाश।

पार्वती की साधना, पुष्पित अमर निवास।

महादेव के नगर में, अतिशय मोहक फूल-

रूप रंग महिमामयी, महके शिखर सुवास।।

हिमगिरि सुंदर छावनी, देवों का संसार।

कल्पतरु का वास जहाँ, फल फूले साकार।

जटा छटा शिर चाँदनी, पहिने शिव मृगछाल-

नयन रम्यता शिवपुरी, स्वर्गापति साकार।।

महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

*महातम मिश्र

शीर्षक- महातम मिश्रा के मन की आवाज जन्म तारीख- नौ दिसंबर उन्नीस सौ अट्ठावन जन्म भूमी- ग्राम- भरसी, गोरखपुर, उ.प्र. हाल- अहमदाबाद में भारत सरकार में सेवारत हूँ